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Baghpat News: हवेलियों के गांव बामनौली ने पैदा किए जांबाज सैनिक

Sat, 10 May 2025 12:50 AM IST
मेरठ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागपत
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हवेलियों के गांव बामनौली ने पैदा किए जांबाज सैनिक। बामनौली गांव ​स्थित हवेली। स्रोत: ग्रामीण
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बागपत। बामनौली की पहचान हवेलियों के गांव के रूप में होती है। मगर इस गांव ने जांबाज सैनिक देश को दिए। बिग्रेडियर रहते हुए चाचा-भतीजे युद्ध में पाकिस्तान को धूल चटा चुके हैं तो वहीं अब सैकड़ों सैनिक देश की रक्षा के लिए तैनात हैं। गांव का चौराहा हो या चौपाल, हर ओर ग्रामीणों में देशभक्ति हिलाेरे मारती दिखती है।
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बामनौली की शानदार पुरानी हवेलियां गांव को खास बनाती हैं। यहां कोई एक-दो नहीं, बल्कि बीस से ज्यादा पुरानी हवेलियां हैं और अंग्रेजों के समय में यहां से मुंबई तक व्यापार होता था। यहां बड़े व्यापारी रहते थे और उन्होंने ही हवेलियां बनवाई थी। मगर इससे भी बड़ी बात यह है कि इस गांव में सैनिकों की कमी नहीं है।
ग्रामीणों ने बताया कि उनके गांव के युवाओं को पहले से ही देश की रक्षा के लिए सेना में भर्ती होने का जज्बा रहा। अब 200 से ज्यादा सैनिक देश की रक्षा के लिए तैनात हैं। जबकि 300 से ज्यादा पूर्व सैनिक हैं।
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मास्टर प्रहलाद सिंह बताते हैं कि गांव के ब्रिगेडियर विष्णुभगवान व इनके भतीजे बिग्रेडियर रामेश्वर सिंह ने 1965 में पाकिस्तान से हुए युद्ध में सेवा दी। ब्रिगेडियर रामेश्वर सिंह ने बहादुरी दिखाते हुए पाकिस्तान के अंदर घुस कर वहां की सेना के दांत खट्टे करने में कसर नहीं छोड़ी थी।
देश के लिए किए प्राण न्यौछावर
वर्ष 1999 के कारिगल युद्ध में पाकिस्तान सीमा पर राजस्थान के बाडमेर में सेवा दे चुके कैप्टन सतेंद्र सिंह बताते हैं कि बामनौली गांव के सैकड़ों युवा पूर्व में सिपाही से लेकर ब्रिगेडियर पदों पर रह चुके हैं। उन्होंने बताया कि कारगिल युद्ध में उनके गांव के हवलदार देशपाल सिंह कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी फौज के दांत खट्टे करते हुए शहीद हो गए थे।
200 सैनिक देश की रक्षा में तैनात
बामनौली के चौधरी साहब सिंह बताते हैं कि हमारे गांव के 200 से ज्यादा सैनिक देश की रक्षा के लिए तैनात हैं। वहीं पूर्व सैनिक भी सैकड़ों में हैं। हमारे गांव के युवाओं को सेना और पुलिस में जाने का जुनून है। अब गांव के काफी युवक तो यूपी पुलिस में भर्ती हुए हैं।
यहां होता था सोना और लोहे का कारोबार
बामनौली की गिनती न केवल साधन संपन्न गांवों में होती है। कैप्टन सतेंद्र सिंह के अनुसार बामनौली में 1950 में सोना तथा लोहे का बड़ा करोबार होता था। सिंगापुर से भी गांव में सोना आता था। इसके अलावा देश के मुख्य व्यापारिक केंद्रों में बामनौली रहा है। हालांकि यहां से धीरे-धीरे व्यापारी दिल्ली व अन्य जगहों पर जाकर बस गए और उनके परिवार भी वहीं रहे।
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