अहमदाबाद में हुए विमान हादसे ने बागपत में वर्ष 2018 में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश की घटना की लोग दोबारा चर्चा करने लगे हैं। यहां हेलीकॉप्टर क्रेश में दो पायलट ने कूदकर अपनी जान बचाई थी।
गुजरात के अहमदाबाद में हुई विमान हादसे की दर्दनाक घटना ने हर किसी को हिलाकर रख दिया। इस हादसे के बाद बागपत में वर्ष 2018 में हुए हेलीकॉप्टर क्रैश की घटना की लोग दोबारा चर्चा करने लगे। उस हेलीकॉप्टर से पायलटों ने कूदकर जान बचाई थी और खेतों में पड़े उस हेलीकॉप्टर को लोग कंधे पर उठाकर बाहर ले आए थे।
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पांच अक्तूबर 2018 में हिंडन एयरफोर्स स्टेशन गाजियाबाद से प्रशिक्षण के लिए उड़ा दो सीटर माइक्रो एयरक्राफ्ट (एमएल-130) इंजन में तकनीकी खराबी के कारण रंछाड़ गांव में क्रैश हो गया था।
पायलटों ने इसकी आपात लैंडिंग का भी प्रयास किया, मगर हेलीकॉप्टर सुरक्षित नहीं उतर सका था। हेलीकॉप्टर का अगला हिस्सा जमीन में टकराकर खेत में धंस गया था। दोनों पायलटों ने कूदकर अपनी जान बचा ली थी।
हेलीकॉप्टर के गिरने के बाद ग्रामीण खेतों में पहुंचे और उसको उठाकर बाहर खाली जगह में लेकर आ गए थे। इस घटना की बृहस्पतिवार को दोबारा से चर्चा होने लगी।
ढिकौली में 1964 में हेलीकॉप्टर हुआ था क्रैश
ढिकौली गांव में वर्ष 1964 में हरपाल सिंह के खेत में हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया था। पायलट ने पैराशूट से अपनी जान बचाई थी। गांव के बुजुर्ग अतर सिंह, ओमपाल, कंवरपाल और सुशील चौधरी बताते हैं कि 1964 में जंग के दौरान हेलीकॉप्टर जाते हुए क्रैश हो गया था।
तब ग्रामीण डर गए थे कि कहीं गांव पर ही हमला तो नहीं हो गया। रंछाड़ गांव में वर्ष 1955 में पहले भी एक हेलीकॉप्टर को जमीन पर उतर गया था। गांव के रामवीर, परमवीर, सरदार सिंह, रविंद्र हट्टी ने बताया कि पहले भी तकनीकी खराबी के चलते हुए विमान को उतारा गया है।