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Baghpat: फोन पर प्रेमी से बात करने के शक में पत्नी की हत्या, कोर्ट में गवाह तो मुकर गए थे, ऐसे मिली सजा...

Mon, 09 Dec 2024 07:18 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, बागपत

सार

तीन साल पहले गला दबाकर प्रियंका की हत्या की गई थी। पति का कहना था कि उसने आत्महत्या की है, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया कि गले की ऐसी हड्डी टूटी है, जो दबाने से ही टूट सकती है। 
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कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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फोन पर किसी और से बात करने के शक में गला घोटकर पत्नी की हत्या करने वाले पति को न्यायाधीश ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई और दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड अदा नहीं करने पर हत्यारे पति की दो माह की सजा बढ़ाई जाएगी।
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जिला शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि मई 2021 में शामली की नत्थो देवी ने छपरौली थाने में मुकदमा दर्ज कराया। नत्थो ने आरोप लगाया कि उसकी भांजी प्रियंका निवासी पट्टी भड़ाला ऊन जनपद शामली की शादी चार साल पहले रठौड़ा गांव के सुनील के साथ हुई थी। शादी के बाद सुनील अपनी पत्नी प्रियंका पर किसी से फोन पर बात करने का शक करने लगा। आठ मई 2021 की दोपहर गला दबाकर प्रियंका की हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया और जांच के बाद आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया। 
 

जिला एवं सत्र न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई के दौरान जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल नेहरा ने सजा पर बहस की। सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश संजय कुमार मलिक ने सुनील को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
 

पक्षद्रोही हुए गवाह, पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने साबित की हत्या
जिला शासकीय अधिवक्ता राहुल नेहरा ने बताया कि प्रियंका की हत्या के बाद पुलिस ने एक फोन, हत्या में प्रयुक्त रस्सी बरामद कर सुनील को जेल भेज दिया। इसमे सुनील की तरफ से बचाव पक्ष में प्रियंका के आत्महत्या करने का दावा किया। इस मुकदमे में वादिनी नत्थो समेत कई लोगों को गवाह बनाया गया। सुनवाई के दौरान कई गवाह अपनी गवाही से मुकर गए, जबकि वादिनी ने मुकदमे के पक्ष में गवाही दी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतका के गले में हायड बोन नाम की हड्डी टूटने से मौत होना बताया गया, जो हत्या या हत्या के प्रयास में ही टूटती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में प्रियंका की हत्या होना साबित हुआ। इन्हीं सबूतों के आधार पर सुनील पर दोषसिद्ध हुआ। इस प्रकरण में बचाव पक्ष कोई दलील नहीं दे पाया।
 
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बिन मां-बाप की बेटी को मिला न्याय
प्रियंका के माता-पिता की पहले ही मौत हो गई थी। उसके रिश्तेदारों ने उसका पालन पोषण कर शादी कराई। पति-पत्नी में झगड़े के बाद समझौता कराने के लिए मौसी ही आती थी। सुनील को सजा सुनाई जाने के बाद परिवार वाले कहने लगे कि बिन मां-बाप की बेटी को न्याय मिल गया।
 
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