बताया कि वे हथियारों को मेरठ से लाकर लोनी और गाजियाबाद समेत अन्य स्थानों पर आठ से 10 हजार रुपये प्रति राइफल के हिसाब से बेचते थे। पहले भी कई बार इन्होंने गाजियाबाद में ही तमंचे और राइफल बेची थी। अब वे गाजियाबाद में राइफलों और तमंचे को बेचने के लिए ले जा रहे थे। पुलिस ने मुकदमा दर्ज करके शनिवार को चारों तस्करों को अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया।
हथियार देने वाले व खरीदने वाले का पता नहीं लगा सकी पुलिस
पुलिस ने हथियारों की तस्करी करने वालों को जरूर पकड़ लिया है, लेकिन यह हथियार किस जगह से लेकर आते है और गाजियाबाद व लोनी में किसको सप्लाई करने थे। यह पुलिस अभी तक पता नहीं लगा सकी है। पुलिस के अनुसार, तस्कर लगातार बरगला रहे हैं और बता रहे हैं कि मेरठ में एक पार्क में कोई व्यक्ति आकर हथियार रखकर चला जाता हैं और एक महिला आकर मुंह ढककर पैसे लेकर चली जाती है। इस तरह से तस्कर पुलिस को घुमा रहे हैं। वहीं, पुलिस यह भी पता नहीं लगा सकी कि गाजियाबाद में किसे हथियार सप्लाई करने थे।
मेरठ में चल रही अवैध हथियारों की फैक्टरी
जिस तरह से तस्करों को हर बार मेरठ से हथियार मिल रहे हैं, उससे साफ है कि मेरठ में हथियारों की फैक्टरी चल रही है। पुलिस के सामने बड़ी चुनौती है कि हथियारों की तस्करी के पूरे नेटवर्क का पता लगाकर शिकंजा कसा जाए।
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मेरठ का आरिफ है मुख्य तस्कर