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Baghpat: 12 की उम्र में हाफिज-ए-कुरआन बना उमर... दूल्हे की तरह पहनाई नोटों की माला, गांव में घोड़ी पर घुमाया

Sun, 09 Feb 2025 03:33 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, बागपत

सार

उमर को सात साल की उम्र में गाजियाबाद के मदरसे में भेजा गया था। शनिवार को वह गांव लौटा तो उसका भव्य स्वागत किया गया। उमर का कहना है कि डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना उसका मकसद है। 
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गांव में घोड़ी पर घुमाया जाता उमर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रटौल कस्बे का उमर 12 साल की उम्र में हाफिज-ए-कुरआन बन गया। अब वह मुफ्ती की पढ़ाई करेगा। एमबीबीएस कर लोगों की सेवा करना उसका मकसद है। हाफिज बनने पर रविवार को कस्बे में उमर का पैसों की माला पहनाकर स्वागत किया और घोड़े पर बैठाकर कस्बे में घुमाया गया। 
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रटौल निवासी मोहम्मद दीन के बेटे उमर को हाफिज ए कुरान बनने के लिए परिजनों ने सात वर्ष की उम्र में गाजियाबाद स्थित चिरौड़ी के एक मदरसे में पढ़ाई के लिए भेज दिया था। वहां पांच साल तक पढ़ाई की और मेहनत व लगन से उमर ने हाफिज ए कुरान की उपाधि हासिल की। उसने कक्षा 5वीं तक हिंदी व अंग्रेजी की पढ़ाई की है। वह रोज सुबह पांच बजे उठकर कुरआन की तिलावत करता और समय होने पर स्कूल चला जाता था। उपाधि हासिल करने के बाद कस्बे में पहुंचने पर उमर का स्वागत किया गया। 
परिजनों ने खुशी में एक घोड़ी मंगवाई और दूल्हे की तरह सजाकर घोड़ी पर बैठाकर कस्बे में घुमाया गया। परिजन सलीम, साजिद का कहना है कि हाफिज ए कुरान बनकर उसने छोटी सी उम्र में परिवार का नाम रोशन कर दिया है। 

 
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हाफिज की उपाधि के लिए देवबंद जाएगा उमर 
उमर ने बताया कि अब वह देवबंद जाकर हाफिज की उपाधि लेगा और डॉक्टर बनने की दिशा में काम करेगा। कुरआन के इंसानियत के पैगाम को फैलाएगा और एमबीबीएस करके मरीजों की सेवा करेगा। 

 
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