रटौल निवासी मोहम्मद दीन के बेटे उमर को हाफिज ए कुरान बनने के लिए परिजनों ने सात वर्ष की उम्र में गाजियाबाद स्थित चिरौड़ी के एक मदरसे में पढ़ाई के लिए भेज दिया था। वहां पांच साल तक पढ़ाई की और मेहनत व लगन से उमर ने हाफिज ए कुरान की उपाधि हासिल की। उसने कक्षा 5वीं तक हिंदी व अंग्रेजी की पढ़ाई की है। वह रोज सुबह पांच बजे उठकर कुरआन की तिलावत करता और समय होने पर स्कूल चला जाता था। उपाधि हासिल करने के बाद कस्बे में पहुंचने पर उमर का स्वागत किया गया।
परिजनों ने खुशी में एक घोड़ी मंगवाई और दूल्हे की तरह सजाकर घोड़ी पर बैठाकर कस्बे में घुमाया गया। परिजन सलीम, साजिद का कहना है कि हाफिज ए कुरान बनकर उसने छोटी सी उम्र में परिवार का नाम रोशन कर दिया है।