एलआईसी एजेंट ने किश्तों के पैसे लगातार ऑनलाइन माध्यम से लिये। मगर जब सैन्यकर्मी की मौत के बाद परिवार क्लेम लेने पहुंचा तो पता चला कि किश्त तो जमा ही नहीं की जा रही, इसलिए पॉलिसी लैप्स हो गई।
एलआईसी एजेंट ने किस्त लेकर जमा नहीं कराई तो किशनपुर बराल गांव निवासी सैनिक पपिन तोमर की मौत के बाद परिवार को 41.67 लाख रुपये की सहायता राशि नहीं मिली। सैनिक की पत्नी रीता तोमर ने एलआईसी एजेंट और उसकी बेटे के खिलाफ छपरौली थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
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किशनपुर बराल गांव निवासी रीना तोमर ने बताया कि उनके पति पपिन तोमर भारतीय सेना में तैनात थे। उनका छपरौली निवासी सत्यवीर सिंह के यहां आना जाना था। वर्ष 2021 में सत्यवीर सिंह ने उसके पति पपिन तोमर की दस लाख रुपये की एलआईसी की पॉलिसी अपनी पत्नी एलआईसी एजेंट सुमेश देवी से करवा दी। असम में तैनाती के दौरान पति पपिन तोमर ने किस्त के रुपये सत्यवीर सिंह, उसके बेटे गौतम और पत्नी सुमेश देवी को ऑनलाइन ट्रांसफर किए।
नवंबर 2024 में सत्यवीर सिंह की सड़क हादसे में मौत हो गई। जनवरी 2025 में पपिन तोमर छुट्टी लेकर घर आए। बीमार होने पर दिल्ली के अस्पताल में उपचार के दौरान 15 जनवरी 2025 को उनकी मौत हो गई।
उन्होंने बड़ौत स्थित एलआईसी कार्यालय में जाकर पॉलिसी के दस्तावेज दिखाए तो वहां तैनात कर्मियों ने बताया कि सितंबर 2023 के बाद से किस्त जमा नहीं होने के कारण पॉलिसी निरस्त कर दी गई, जबकि नवंबर 2023 के बाद की किस्त के रुपये उसके पति ने ऑनलाइन ट्रांसफर कर रखे थे।
गौतम और उसकी मां सुमेश देवी के पास जाकर किस्तों के बारे में जानकारी की तो उन्होंने डायरी में हिसाब दिखवाने की बात कही और दो माह तक टालते रहे। पॉलिसी निरस्त होने की वजह से परिवार को 41.67 लाख रुपये की सहायता राशि भी नहीं मिल सकी।
रीना तोमर ने बैंक के दस्तावेज भी पुलिस को सौंपे। जांच के बाद पुलिस को एजेंट की गड़बड़ी मिली और पुलिस ने गौतम खोखर, उसकी मां एलआईसी एजेंट के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। छपरौली पुलिस का कहना है कि इसमें मामले में जांच शुरू कर दी गई है, जांच के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।