जनपद की पहचान शूटरों की पौध तैयार करने में रही है। अब तक यहां पर 400 से अधिक राष्ट्रीय और 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय शूटर बन चुके हैं। यहां पर बेटों के साथ-साथ बेटियां भी निशानेबाजी में अपना लोहा मनवा चुकी हैं। अब सभी ओलंपिक में देश के लिए पदक लाने के लिए दिन-रात कड़ी मेहनत कर रहे हैं।
दिल्ली से बागपत महज 50 किमी दूर स्थित है। यहां पर दादी चंद्रों शूटिंग एकेडमी, बीपी सिंहल शूटिंग रेंज जौहड़ी, खेलो इंडिया शूंटिंग ट्रेंनिंग एकेडमी, बिग शाट शूटिंग एकेडमी, ओम साईं शूटिंग एकेडमी सहित तकरीबन 100 से अधिक शूटिंग रेंज संचालित हैं। इनमें रोजाना सैकड़ों की संख्या में निशानेबाज शूटिंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं। सुनकर थोड़ा अजीब लगेगा, लेकिन यह बिल्कुल सच है कि यहां बेटियां परिवार के लोगों से दहेज में न सोना मांगती है, न कार, उन्हें चाहिए बस एक बंदूक।
निशानेबाज
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पदक जीतकर पा चुके सरकारी नौकरी
जौहड़ी में स्थित बीपी सिंघल शूटिंग रेंज (यहीं पर भारतीय खेल प्राधिकरण का प्रशिक्षण केंद्र भी है) पर रोजाना सैकड़ों बेटियां अभ्यास करती हैं। राष्ट्रीय और अतंरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली निशानेबाजी प्रतियोगिताओं में ढेरों सोने-चांदी और कांस्य के पदक जीत चुकी हैं।
इसी आधार पर इन बेटियों को रोजगार मिल गया है। कोई भारतीय खेल प्राधिकरण की कोच बनकर निशानेबाजी सिखा रही है तो कोई एयर इंडिया में नौकरी कर रही है। कोई सीआरपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट बन देश सेवा कर रही है तो कोई अध्यापक बन देश का भविष्य गढ़ रही हैं।
कोच नीतू श्योरान
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ये ले गई थी दहेज में बंदूक
बंदूक मांगने के पीछे निशानेबाज बेटियों का कहना है कि वह माता-पिता के सामने प्रस्ताव रखती हैं कि शादी से पहले उन्हें (बंदूक पिस्टल या रायफल) दिला दो। इससे वह राष्ट्रीय और अतंरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतकर नौकरी पा सकें। नौकरी मिलने के बाद वह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो जाएंगी और उसके बाद दहेज के बिना ही उनकी शादी हो जाएगी, जिसके बाद उनकी शादी में दिया जाना वाला लाखों रुपये का दहेज भी नहीं देना पड़ेगा।
अंगदपुर गांव की रहने वाली और जौहड़ी गांव में ही भारतीय खेल प्राधिकरण की कोच नीतू श्योरान ने बताया कि उसके माता-पिता ने दहेज में दिए जाने वाले रुपयों में कटौती कर शादी से पहले ही उसे पिस्टल दिला दी थी। मेहनत के बाद उसे इसी शूटिंग रेंज पर कोच की नौकरी मिल गई। जौहड़ी गांव की रहने वाली सीमा तोमर ने बताया कि उसने भी शादी से पहले ही पिस्टल ले ली थी और उसे एयर इंडिया में नौकरी मिल गई।
उसके बाद उसकी शादी हुई तो ससुराल पक्ष के लोग बहुत खुश हुए कि निशानेबाज बहू आई है। वह नौकरी के साथ-साथ एयर इंडिया में भी नौकरी कर रही है। किशनपुर बराल गांव की सर्वेश तोमर ने बताया कि वह अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज है और अब सीआरपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर तैनात है। उसने भी माता-पिता से शादी से पहले ही पिस्टल ले ली थी, उसी के आधार पर उसे नौकरी मिली और अच्छी शादी हुई।
अंतरराष्ट्रीय शूटर अखिल श्यौराण
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ये बिखरे रहे देश-दुनिया में अपनी प्रतिभा का जलवा
पेरिस ओलंपिक कोटा प्राप्त कर चुके जौहड़ी गांव के अंतरराष्ट्रीय शूटर अखिल श्यौराण पुरुषों की 50 मीटर राइफल थ्री पोजीशन में कांस्य पदक जीतकर अपने करियर में दूसरी बार विश्व कप में व्यक्तिगत पदक जीता चुके हैं। इसके अलावा आरिफपुर खेड़ी गांव के किसान किरणपाल की बेटी अंतरराष्ट्रीय शूटर युविका तोमर जूनियर एशियन चैंपियनशिप दोहा में स्वर्ण पदक हासिल कर चुकी है। वही खेल इंडिया ट्रस्ट के अंतरराष्ट्रीय शूटर गौरव राणा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्जनों पदक झटक चुके हैं।
गौरव भारतीय वायुसेना में कार्यरत हैं। इसके अलावा दूसरे शूटर कुनाल राणा भी दर्जनों पदक जीत चुके हैं। खेल इंडिया ट्रस्ट के ही शूटर जितेन्द्र तोमर जो दिल्ली पुलिस मेें है। जितेंद्र तोमर भी दिल्ली पुलिस वर्ल्ड पुलिस गेम्स अमेरिका में स्वर्ण सहित दर्जन ढेरों पदक झटक चुके हैं। एक अन्य शूटर विपिन सहरावत जो आर्मी मेंं है, एशियन एयर गन शूंटिग कुवैत में सिल्वर पदक सहित ढेरों पदक झटक चुके हैं। इसी खेल इंडिया ट्रस्ट के शूटर लक्ष्य बंसल यूथ कामनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक सहित अन्य कई पदक झटक चुके हैं।
ये बोले शूटर
मैं ओलंपिक का सपना लेकर खेल रही हूं, मुझे उम्मीद है कि हैं एक दिन देश के लिए ओलंपिक मेें खेलकर पदक जीतूगीं। -सुहानी तोमर।
देश के लिए पदक लाना एक गर्व की बात है, इसी सपने के साथ मैं रोजाना घंटों मेहनत कर रहा हूं। ताकि ओलंपिक में देश के लिए पदक जीत संकू। - संकित कश्यप।
मुकेश पंवार