Kanwar Yatra 2025: पुरा महादेव मंदिर में त्रयोदशी का जलाभिषेक करने के लिए दो किमी तक लाइनें लग गईं। कई घंटे बाद जलाभिषेक का नंबर आया। इस दौरान अधिकारियों ने मेले की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
पुरा के परशुरामेश्वर महादेव मंदिर में मंगलवार को कांवड़ियों का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करने के लिए कांवड़ियों व श्रद्धालुओं की दो किमी लंबी लाइन लगी रही। मंदिर में छह लाख से ज्यादा कांवड़ियों व श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया।
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पुरा महादेव मंदिर में चल रहे चार दिवसीय श्रावणी मेले में दूसरे दिन कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर में त्रयोदशी का जलाभिषेक करने के लिए सुबह से लाइन लगनी शुरू हो गई थी। कांवड़ियों व श्रद्धालुओं की लाइन परशुराम खेड़ा तक पहुंच गई और करीब चार घंटे बाद जलाभिषेक का नंबर आया। इसके बाद ही हरिद्वार से गंगाजल लेकर आए लाखों कांवड़ियों ने जलाभिषेक किया।
भीड़ को देखते हुए व्यवस्था बनाने के लिए मंदिर में आरएएफ के साथ ही पीएसी के जवान तैनात किए गए, जबकि पुलिस को बाहर की तरफ लगाया गया। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित जयभगवान शर्मा ने बताया कि मंगलवार देर शाम तक मंदिर में छह लाख कांवड़ियों व श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया है।
वहीं डीएम अस्मिता लाल व एसपी सूरज कुमार राय ने मंदिर में पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और अधिकारियों व पुलिस कर्मियों को कांवड़ियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने देने के निर्देश दिए। इनके बाद डीआईजी कलानिधि नैथानी व मंडलायुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद भी निरीक्षण करने पहुंचे। वह काफी देर तक वहां रहे और कांवड़ियों के साथ ही सुरक्षा कर्मियों से बातचीत की।
मेले में कांवड़ियों व श्रद्धालुओं ने की खरीदारी
पुरा महादेव मंदिर परिसर में लगे मेले में श्रद्धालुओं व कांवड़ियों ने खरीदारी की। जहां महिलाओं ने घरेलू सामान के अलावा मूर्ति, माला, सिंदूर आदि खरीदा, वहीं उनके साथ आए बच्चों ने खिलौने लिए। भीड़ को देखते हुए दुकानदारों के चेहरे भी खिले रहे।
झंडा पूजन के बाद शुरू हुआ चतुर्दशी का जलाभिषेक
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित जयभगवान शर्मा ने बताया कि बुधवार सुबह तीन बजकर 35 मिनट पर झंडा पूजन शुरू हुआ और चार बजकर 35 मिनट पर झंडारोहण करने के बाद चतुर्दशी का जलाभिषेक शुरू किया गया। चतुर्दशी पर जलाभिषेक करने के लिए कांवड़िये मंदिर में रुकना शुरू हो गए थे, क्योंकि काफी कांवड़िये अपनी मन्नत के अनुसार चतुर्दशी का जलाभिषेक करते हैं। झंडारोहण के बाद कांवड़ियों ने जलाभिषेक किया।