समिति ने पाया कि 133 ड्रेन में से 113 में अभी भी एनजीटी के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। नगर निकायों और प्रदूषित इकाइयों की लापरवाही पर कमेटी की संस्तुति पर 8.7 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस भेजकर संबंधित इकाईयों से एक सप्ताह में जुर्माना जमा कराने के आदेश दिए गए हैं। सहारनपुर से लेकर गाजियाबाद तक यह जुर्माना पांच लाख रुपये प्रति माह और प्रति ड्रेन के हिसाब से लगाया गया है। डॉ चंद्रवीर सिंह का कहना है कि तीनों नदियों के प्रदूषण से सैंकड़ों गांव के ग्रामीणों को मुश्किलें उठानी पड़ रही है।
शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के आदेश हो चुके जारी
डॉ चंद्रवीर सिंह ने बताया कि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने, टैँकर से पानी पहुंचाने और टंकी लगवाने के आदेश पहले ही एनजीटी जारी कर चुका है, लेकिन धरातल पर आमजन को शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है।