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बागपत: नदियों को गंदा करने वाले निकाय और प्रदूषित इकाइयों पर आठ करोड़ का जुर्माना

Wed, 03 Feb 2021 12:02 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बागपत

सार

  • दो सदस्यीय कमेटी की संस्तुति पर एनजीटी ने जारी किए आदेश
  • पर्यावरण दोआबा समिति ने एनजीटी में दाखिल किया था मामला
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काली नदी में गिरता फैक्ट्री का गंदा पानी।  - फोटो : ब्यूरो
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विस्तार
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एनजीटी ने हिंडन, काली और कृष्णा नदी के प्रदूषण पर फिर सख्ती दिखाई है। नदियों के प्रदूषण पर छह जिलों के नगर निकायों और प्रदूषित इकाइयों पर 8.7 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है। निगरानी कर रही कमेटी की संस्तुति पर यह कार्रवाई की गई है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई हुई।

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दोआबा पर्यावरण समिति के चेयरमैन डॉ चंद्रवीर  राणा ने बताया कि गाजियाबाद, बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर से होकर गुजरने वाली हिंडन, काली और कृष्णा नदी का जल प्रदूषित है।

प्रदूषित इकाइयों का पानी लगातार नदियों में प्रवाहित किया जा रहा है। दोआबा पर्यावरण समिति की याचिका पर एनजीटी ने हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज एचवी राठौर और सेवानिवृत्त मुख्य सचिव डॉ अनूप चंद पांडेय की कमेटी गठित की थी। 

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समिति ने पाया कि 133 ड्रेन में से 113 में अभी भी एनजीटी के आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है। नगर निकायों और प्रदूषित इकाइयों की लापरवाही पर कमेटी की संस्तुति पर 8.7 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोटिस भेजकर संबंधित इकाईयों से एक सप्ताह में जुर्माना जमा कराने के आदेश दिए गए हैं।  सहारनपुर से लेकर गाजियाबाद तक यह जुर्माना पांच लाख रुपये प्रति माह और प्रति ड्रेन के हिसाब से लगाया गया है। डॉ चंद्रवीर सिंह का कहना है कि तीनों नदियों के प्रदूषण से सैंकड़ों गांव के ग्रामीणों को मुश्किलें उठानी पड़ रही है।

शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के आदेश हो चुके जारी
डॉ चंद्रवीर सिंह ने बताया कि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने, टैँकर से पानी पहुंचाने और टंकी लगवाने के आदेश पहले ही एनजीटी जारी कर चुका है, लेकिन धरातल पर आमजन को शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। 
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