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80 सिलिंडरों के लिए जूझने के बाद खुद लगवाए ऑक्सीजन प्लांट

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बागपत। कोरोना में जहां सबसे ज्यादा ऑक्सीजन की किल्लत झेलनी पड़ी थी और प्रतिदिनि 80 सिलिंडर ऑक्सीजन के लिए भी दूसरे राज्यों तक दौड़ना पड़ रहा था। वहीं, अब अपने ही ऑक्सीजन प्लांट लगवा लिए हैं।
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कोरोना की दूसरी लहर का पीक होने पर ऑक्सीजन की किल्लत शुरू हुई तो प्रशासन ने सप्लाई करने वालों के सिलिंडर कब्जे में लेकर खुद पूरी व्यवस्था संभाली थी। इसके बावजूद स्थिति काफी खराब रही और ऑक्सीजन की किल्लत दूर नहीं हो सकी। हालात यह थे कि 80 सिलिंडर ऑक्सीजन के लिए भी जूझना पड़ रहा था। हरियाणा तक से ऑक्सीजन की व्यवस्था करनी पड़ी थी। इसके मद्देनजर जिला अस्पताल में 500 एलपीएम, खेकड़ा में 466 एलपीएम व सरूरपुर में 333 एलपीएम का प्लांट लगाया है।
241 सिलिंडर ऑक्सीजन प्रतिदिन तीनों प्लांट से मिलेगी
जिला अस्पताल में लग रहे 500 एलपीएम के प्लांट से करीब 100 सिलिंडर, खेकड़ा सीएचसी पर लग रहे 466 एलपीएम के प्लांट से करीब 78 सिलिंडर व सरूरपुर में लग रहे 333 एलपीएम के प्लांट से करीब 63 सिलिंडर ऑक्सीजन प्रतिदिन मिलेगी। इसके लिए प्लांट को 24 घंटे चलाना होगा। अगर ऑक्सीजन को सिलिंडर में भरने की जगह लाइन से सीधे बेड तक पहुंचाया जाएगा तो जिला अस्पताल में सामान्य वाले 125 बेड व आईसीयू वाले 30 बेड के लिए ऑक्सीजन की पूर्ति प्लांट से होगी। इस तरह खेकड़ा में सामान्य वाले 100 बेड व आईसीयू वाले 25 बेड और सरूरपुर में सामान्य वाले 80 बेड व आईसीयू वाले 20 बेड के लिए ऑक्सीजन की पूर्ति होगी। हालांकि अभी जरूरत के अनुसार ही प्लांटों को चलाया जा रहा है। अभी करीब पांच घंटे प्लांट चलाने पर ही ऑक्सीजन की पूर्ति हो रही है।
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यहां ऑक्सीजन के तीन सरकारी प्लांट लगाए गए हैं। अभी ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत नहीं है। यदि ऑक्सीजन की ज्यादा जरूरत पड़ती है तो किसी पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है, बल्कि प्लांट से पूर्ति हो सकती है।-डॉ. दिनेश कुमार, सीएमओ
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