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देश की एकता और अखंडता के लिए निकाला अमन मार्च

Mon, 14 Aug 2017 01:10 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत-बड़ौत
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बागपत में अमन मार्च में भाग लेते सर्वसमाज के लोग। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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स्वतंत्रता दिवस पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भाईचारे की मिशाल कायम की। शहर में शांति मार्च रैली निकाली। इसमें सभी धर्मों के लोगों ने भाग सिया। इसमें वक्ताओं ने एकजुट रहने का संदेश दिया।  
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रविवार को जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने हिंदू मुस्लिम भाईचारे को बनाने के लिए शांति मार्च रैली निकाली। इसका शुभारंभ मदरसा अनवारूल कुरान से शुरू हुआ जो शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए मुगलपुरा मोहल्ले में संपन्न हुई। इसके बाद सभा का आयोजन किया, इसमें सभी धर्मों के लोगों ने हिस्सा लिया। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के जिला सचिव हाफिज मोहम्मद कासिम साहब ने कहा हिंदुस्तान की आजादी के लिए हिंदू और मुसलमान ने कुर्बानियां दी है। इसके बाद ही लोगों को खुली हवा में सांस लेने का मौका मिला। 

सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने के लिए हिंदू और मुस्लिम समाज के लोगों को एकजुट रहना होगा। इस मौके पर नवाब अहमद हमीद, चेयरमैन राजुद्दीन एडवोकेट, मनोज वर्मा, शहर काजी हबीबुर्रहमान, डॉ. शालिनी राकेश ने विचार व्यक्त किए। इसमें रमन पंवार, एडवोकेट संजय पंवार, अन्नू जैन, अश्वनी तोमर, डॉ. शकील, इरशाद खान, जाहिद फौजी, डॉ. मुजम्मिल, डॉ. समर, महफूज पहलवान, भूरा खलीफा, हाजी निसार, यासीन कुरैशी, मेहरबान, तन्नी आदि रहे।  
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 बड़ौत में आजादी के पर्व पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के नेतृत्व में रविवार को अमन मार्च निकाला गया। सांप्रदायिक एकता, कौमी एकता, इत्तिहाद, आपसी भाईचारा, देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाने के मकसद निकाले गए अमन मार्च में सभी धर्मों के लोगों ने शिरकत की।

फूंस वाली मस्जिद से शहर इमाम मौलाना आरिफ उल हक ने झंडा दिखाकर अमन मार्च को रवाना किया। इस मौके पर मौलाना अरिफ उल हक ने कहा कि इस अमन मार्च में लोग एकता को साकार करें, अनेकता में एकता हो, यहीं भारत की विशेषता है। हमारा एक ही नारा है हिंदू-मुस्लिम की दीवार को तोड़ एकता के सूत्र में बंध जाओ।

अमन मार्च में नारे लिखे तख्तियां और झंडा लेकर सभी समाज के लोग चल रहे थे। मकरजी मस्जिद फूंस वाली से सुबह 10 बजे शुरू होकर अमन मार्च नगर के मुख्य बाजार, दिल्ली बस स्टैंड आदि कई मार्गों से होकर ईदगाह पर समाप्त हुआ। 

वहां हुई सभा में मुख्य अतिथि दिल्ली जमीयत कार्यालय से मुफ्ती मौहम्मद जाकिर ने कहा कि जमीयत उलेमा ए हिंद के संस्थापकों में शेख-उल-हिंद मौलाना महमूद हसन, मौलाना सैय्यद हुसैन, अहमद मदनी, मौलाना अहमद, सईद देहलवी आदि मुस्लिम विद्वान शामिल रहें।

जमीयत उलेमा ए हिंद ने जंग-ए-आजादी में रेशमी रूमाल तहरीक के जरिये अहम किरदार निभाया था और आज तक देश को जोड़ने का काम कर रही है। अध्यक्षता कर रहे हजरत मुफ्ती अब्बास ने कहा कि देश में पिछले कई महीनों से लगातार अल्पसंख्यकों और बहुसंख्यकों के बीच तनाव पैदा करने की कोशिश की जा रही है। 

सांप्रदायिकता और नफरत से भरे बयान दिए जा रहे हैं, जिससे हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को खतरा पैदा हो गया है। हमें जातिवाद, समाजवाद आदि से उठकर सोचने की जरूरत है। वक्ताओं ने स्वार्थ के लिए राजनीतिक रोटियां सेकने वालें लोगों के बहकावे में न आने का आह्वान किया।

पूर्व विधायक चौधरी साहब सिंह, अमित राय जैन, उपेंद्र प्रधान, चौरासी चौधरी सुरेंद्र सिंह, पूर्व विधायक वीरपाल राठी, पंडित विनय शर्मा, डॉ.योगेश जिंदल, अश्वनी तोमर, आचार्य प्रवीण, जमीरूद्दीन अब्बासी आदि ने सभा को संबोधित कर एकता और भाईचारे का संदेश दिया। संचालन रिजवान मलिक ने किया।

इस मौके पर कारी शाबिर, कारी अब्दुल वाजिद, कारी मतलूब, हाजी गुलाब हसन, मौहम्मद आरिफ मलिक, इसरार खान, कारी इरशाद, कारी शाहिद, मौलाना इरफान, मौलाना नौशाद, हाफिज इम्तियाज, हाजी जमील, हाजी शकील, हारून मलिक, शोबी मलिक, मुकीम मलिक, शकील एडवोकेट, मौलाना खालिद, मुफ्ती फुरकान, मुफ्ती जाकिर, मौलाना नौशाद, हाफिज सालिम, फईम अहमद आदि मौजूद रहे।
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