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बागपत-मेरठ हाईवे के निर्माण में गलत भूमि अधिग्रहण का आरोप

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किसानों ने कहा उनकी समस्या की सुनवाई नहीं कर रहे अधिकारी
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अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। अग्रवाल मंडी टटीरी के किसानों ने बागपत-मेरठ हाईवे के लिए गलत तरीके से भूमि अधिग्रहण का आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि अधिग्रहीत भूमि का मुआवजा मिलना चाहिए। बार-बार मांगपत्र दिए जाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं हो रही है।
भाकियू की युवा विंग के जिलाध्यक्ष चौधरी हिम्मत सिंह नेतृत्व में किसान कलक्ट्रेट पहुंचे। किसानों का कहना था कि चकबंदी 1963-64 के हिसाब से सड़क के मध्य से 39 फीट जमीन छोड़कर किसानों को मालिकाना हक दिया गया था। मगर, अब अधिग्रहण 43 फीट से भी अधिक का किया जा रहा है। किसानों को मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है। किसानों ने कहा कि नियमानुसार अधिग्रहण किया जाए और किसानों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। अगर मुआवजा नहीं दिया गया तो किसान आंदोलन करेंगे। संजय कुमार, सहदेव सिंह, अरविंद कुमार मौजूद रहे।
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हाईवे निर्माण बन गया परेशानी की वजह
अग्रवाल मंडी टटीरी। भूमि विवाद के चलते कस्बे में मेरठ-बागपत हाईवे का निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है। निर्माण कार्य न होने के कारण मार्ग पर धूल उड़ रही है। इससे मार्ग से सफर करने वाले लोगों को परेशानियों से जूझना पड़ रहा है। मेरठ-बागपत हाईवे निर्माण को लेकर कस्बे के दुकानदारों व कंपनी के ठेकेदार के बीच विवाद चल रहा है। ठेकेदार से मार्ग के निर्माण के लिए 13 मीटर पर निशानदेही है, जबकि कस्बे के नागरिक दस मीटर पर निर्माण कराने की मांग कर रहे है। नागरिकों का कहना है कि हाईवे की जद में कस्बे के लगभग 250 दुकान, मकान और दो मंदिर आ रहे है। 13 मीटर पर निर्माण कार्य होने पर नागरिकों का काफी नुकसान हो जाएगा। भूलेखों के आधार पर दस मीटर के बाद उनका कब्जा है और अगर दस मीटर से अधिक जमीन पर हाईवे का निर्माण करना है तो उन्हें मुआवजा दिया जाए। व्यापारी नेता अभिमन्यु गुप्ता का कहना है कि व्यापारी और किसानों के हित में कदम उठाया जाना चाहिए।
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