अहोई अष्टमी का व्रत पांच नवंबर को रखा जाएगा। अष्टमी तिथि चार नवंबर की रात्रि 1 बजे से शुरू होगी और पांच नवंबर रात 3 बजकर 19 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार अष्टमी तिथि पांच नवंबर को है। पांच नवंबर को रवि पुष्य योग का शुभ संयोग बनने से व्रत का दोगुना फल मिलेगा।
मान्यता है कि विधि-विधान से अहोई अष्टमी का व्रत करने से माता और संतान दोनों के जीवन में सुख की प्राप्ति होती है। अहोई अष्टमी की पूजा का विधान सांयकाल प्रदोष बेेला में करना श्रेष्ठ बताया गया है। इस बार शाम को पांच बजकर 35 मिनट से शाम छह बजकर 35 तक का समय पूजन के लिए उत्तम है।