बागपत। बच्चों की परवरिश में मां का योगदान सबसे अहम होता है। लेकिन कोरोना महामारी ने कई बच्चों से सिर से ममता की छांव ही छीन ली। ऐसे बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा। ऐसे मामलों बच्चों के पिता भी इस मुश्किल से घिरे रहते हैं कि उन्हें छोड़कर काम पर कैसे जाएं। लेकिन जरूरतें पूरी करने को कमाने जाना भी मजबूरी है।
बागपत ब्लॉक के एक गांव में सब्जी विक्रेता की पत्नी की अप्रैल माह के अंत में खराब हो गई। बुखार के साथ सांस लेने में दिक्कत होने लगी। परिजनों ने निजी चिकित्सक के यहां उसका उपचार कराया। लेकिन 30 अप्रैल को महिला की मौत हो गई। मां की मौत के बाद अब दस बच्चे बेसहारा हो गए। जिनमें आठ लड़की और दो लड़के हैं। सबसे छोटी बेटी महज तीन महीने की है। सब्जी विक्रेता के माता-पिता भी वृद्ध हो चुके हैं। ऐसे में बच्चों के पालन-पोषण कैसे होगा, इसे लेकर आसपास के लोग भी चिंतित हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी काफी कमजोर है। लोगों का कहना कि सरकार की ओर से परिवार को आर्थिक मदद मिलनी चाहिए।