बागपत। जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर पिछले डेढ़ दशक तक विधायक योगेश धामा के परिवार का कब्जा रहा। पहली बार अनुसूचित जाति की महिला इस पद पर आसीन हुई है। यह भी इतिहास रहा कि रालोद से अलग हटकर कोई इस कुर्सी तक आसीन नहीं हो पाया है।
विधायक योगेश धामा की पत्नी रेणु धामा वर्ष 2005 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीती थीं। इसके बाद 2010 में योगेश धामा इस पद पर काबिज हुए थे। 2015 में फिर से उनकी पत्नी रेणु धामा जिला पंचायत अध्यक्ष बनी थीं। इस बार यह पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित है। जिससे जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की हसरत पाले बैठे कई दिग्गजों को जोरदार झटका लगा था। कुल 20 सदस्यों में से वार्ड-13 में रालोद की ममता देवी और वार्ड-18 में सपा की बबली देवी ही अनुसूचित जाति से हैं। इनके अलावा कोई और सदस्य चुनाव नहीं लड़ सकता था। भाजपा ने सपा की बबली देवी को अपने पाले में करके जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी तक पहुंचने की रणनीति तैयार की परंतु नाकाम रही।
वर्जन
भाजपा ने बढ़त बनाई
जिला पंचायत सदस्यों के निर्णय का स्वागत है। चुनाव में हार-जीत में लगी रहती है। भाजपा ने इस बार जिला पंचायत चुनाव में काफी बढ़त बनाई है। 2015 में भाजपा का एक भी सदस्य नहीं था। इस बार 7 वोट भाजपा के पक्ष में रहे।- विधायक योगश धामा
जनता को सम्मान दें नई अध्यक्ष
हमने लंबे समय तक इस पद पर रहकर जनता की सेवा की है। नए बोर्ड से भी अपेक्षा है कि बिना किसी भेदभाव के पूरे जिले में विकास कार्य कराए। जिस तरह हमने जनता को सम्मान दिया, नई जिला पंचायत अध्यक्ष भी ऐसा ही करेंगी।-रेणु धामा, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष