- ढिकौली गांव में टीम ने पहुंचकर पशुओं की जांच की, बचाव की सलाह दी
संवाद न्यूज एजेंसी
रटौल। ढिकौली गांव में खुरपका व मुंहपका बीमारी से हो रही पशुओं की मौत के बाद जांच करने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ से पशु चिकित्सकों की टीम पहुंची। उन्होंने पशुओं की जांच करने के बाद साफ सफाई रखने की सलाह दी।
ढिकौली गांव में दो माह में 200 से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी और 300 से अधिक पशु बीमार चल रहे हैं। पशुओं के पैरों व मुंह पर घाव बने हुए हैं। सोमवार को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. अरविंद त्रिपाठी ने सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मेरठ के पशु चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम के साथ पहुंचे। टीम में डाॅ. अमित बालियान, डाॅ. अमित कुमार वर्मा, डाॅ. अरविंद सिंह, डाॅ. विकास जायसवाल व डाॅ. रजत सिंह ने 20 से अधिक पशुओं की जांच कर सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे।
प्रोफेसर डाॅ. अमित वर्मा ने किसानों को बीमार पशुओं के मुंह के घावों को पोटेशियम परमैंगनेट (लाल दवा) के हल्के घोल से धोकर छालों पर भुने हुए सुहागा को मक्खन के साथ लेप बनाकर लगाने और पैरों के घावों को नीला थोथा (कॉपर सल्फेट) के घोल 20 ग्राम प्रति लीटर पानी से धोने की सलाह दी। कहा कि इससे पशु ठीक हो जाएंगे और उन्हें परेशानी भी नहीं होगी।
बताया कि मौसम परिवर्तन के कारण बीमारी का खतरा बढ़ जाता है, क्योंकि पशुओं के पास गंदगी हो जाती है। इससे वहां मच्छर भी पनपते है। सितंबर माह में मुजफ्फरनगर के कई गांवों में भी इसी प्रकार के लक्षण पाए गए थे, जिनमें खुरपका एवं मुंहपका वायरस की पुष्टि हुई थी। इस दौरान डाॅ. अशोक गिल, डाॅ. शुभम, डाॅ. नेहा सिन्हा, डाॅ. मानव आदि मौजूद रहे।