शिक्षक के अभिलेखों की जांच करने में बेसिक शिक्षा विभाग को 14 साल लग गए। कई बार शिक्षक से इंटरमीडिएट की मार्कशीट मांगी गई, लेकिन वह नहीं दे सके। जांच पूरी होने के बाद शिक्षक की दो दिन पहले सेवा समाप्त कर दी गई और अब पांच माह के वेतन की रिकवरी की जाएगी।
जिस स्कूल की दिखाई मार्कशीट, वहां के परीक्षा परिणाम पर लगी थी रोक
शिक्षक प्रवीण कुमार ने बिहार के पटना स्थित वीर कुंवर सिंह विद्यालय से वर्ष 1995 में इंटर उत्तीर्ण करने की मार्कशीट अभिलेख में लगा रखी थी, जबकि इस विद्यालय की वर्ष 1995 में मान्यता रद्द करके परीक्षा परिणाम पर रोक लगाई गई थी। जब इस विद्यालय का परीक्षा परिणाम जारी नहीं हुआ था तो शिक्षक मार्कशीट कहां से लेकर आया। इसको फर्जी मानते हुए शिक्षक की सेवा समाप्त कर दी गई है।
14 साल से विद्यालय में बिना वेतन के करता रहा नौकरी
शिक्षक प्रवीण कुमार भी इस उम्मीद से 14 साल तक विद्यालय में नौकरी करता रहा कि उसकी जांच कभी न कभी पूरी होगी। जब जांच पूरी होगी तो 14 साल का वेतन मिल जाएगा, लेकिन इंटरमीडिएट की फर्जी मार्कशीट ने शिक्षक की उम्मीद पर पानी फेर दिया।
- मेरी मार्कशीट फर्जी नहीं थी, उसपर केवल क्रमांक गलत दर्ज था। मैं इस मामले में कोर्ट में जाऊंगा और वहां पूरी बात को रखा जाएगा। - प्रवीण कुमार
- शिक्षक प्रवीण कुमार की इंटरमीडिएट की फर्जी मार्कशीट होने के कारण सेवा समाप्त कर दी गई है। इससे शासन को अवगत करा दिया गया है। शिक्षक को दिए गए वेतन की रिकवरी भी की जाएगी। - गीता चौधरी, बीएसए