मेरठ । बृहस्पतिवार को दोआब विलास होटल में हुई हिंडन मंथन -2026 कार्यशाला में नदी के पुनर्जीवन पर विस्तार से चर्चा की गई। तय किया गया कि हिंडन नदी के पुनर्जीवन को लेकर मेरठ डिक्लेरेशन के नाम से एक प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। इसमें क्या होना चाहिए और किस प्रकार होना चाहिए, इसे सरकार के सामने पेश किया जाएगा। उत्तर प्रदेश राज्य स्वच्छ गंगा मिशन और भारतीय नदी परिषद की ओर से संयुक्त रूप से प्रदेश में जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन विषय पर यह कार्यशाला हुई।
शुभारंभ बतौर मुख्य अतिथि जल शक्ति मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने किया। इस दौरान उन्होंने सरकार की ओर से पूरा साथ देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण और नदी पुनर्जीवन के लिए सरकार परिषद के साथ है। जो भी कार्य किया जाए वह सरकार की योजनाओं को ध्यान में रखकर किया जाए। इस दौरान उन्होंने सरकार की योजना की भी जानकारी दी।
इस मौके पर भारतीय नदी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रमनकांत ने बताया कि परिषद की ओर से निर्मल हिंडन कार्यक्रम के तहत 15 से 19 मार्च 2026 तक नमामि गंगे व उत्तर प्रदेश राज्य स्वच्छ नमामि गंगे के सहयोग से ''हिंडन नदी शोध यात्रा'''' का आयोजन किया गया था। इस यात्रा के माध्यम से जहां हिंडन नदी की वर्तमान परिस्थितियों को जानने का अवसर मिला वहीं नदी किनारे बसे समाज की समस्याओं को भी समझने का प्रयास किया गया। हिंडन नदी पानी की कमी, प्रदूषण व अतिक्रमण जैसी तीन बड़ी समस्याओं से जूझ रही है।
नदी किनारे बसे समाज को प्रदूषित पेयजल, जल-जनित बीमारियां, फसलों को नुकसान, बदबूयुक्त हवा तथा अनेक सामाजिक परेशानियां झेलनी पड़ रही हैं। अब इस नदी को पुनर्जीवन देने का कार्य किया जाएगा। कार्यक्रम में नदी विशेषज्ञ, नदी किनारे गांवों के प्रधान, हिंडन प्रेमी, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, हिंडन नदी बहाव क्षेत्र के सात जनपदों के सरकारी प्रतिनिधि व हिंडन नदी किनारे के निकायों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान कैंट क्षेत्र के विधायक अमित अग्रवाल, मनु गौड़ व शोभित विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कुंवर शेखर विजेंद्र आदि शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने दिए सुझाव
चार तकनीकी सत्रों में सी-गंगा के संस्थापक डॉ. विनोद तारे, पीपुल्स साइंस इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. अनिल गौतम, डॉ. डीएस बुंदेला, पदमश्री भारत भूषण त्यागी, अधिशासी अभियंता अनुपम, सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी समेत आदि ने इस पर सुझाव दिए।