- विकास प्राधिकरण ने कॉलोनी विकसित करने के लिए जिस जमीन के बैनामे शुरू कराए, उसपर चार किसानों ने लोन लिया हुआ
- एक-एक लाख रुपये का लोन होने के कारण बैनामों को रोकना पड़ा, अफसरों कहने पर भी किसान नहीं कर रहे लोन जमा
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। बागपत-बड़ौत-खेकड़ा विकास प्राधिकरण ने 17 साल बाद आवासीय कॉलोनी विकसित करने के लिए कदम बढ़ाए मगर चार किसानों की जमीन पर एक-एक लाख रुपये के लोन ने उसपर ब्रेक लगा दिया। 70 करोड़ रुपये की जमीन के बैनामों में यह चार लाख रुपये का लोन बाधा बन गया और इस कारण बैनामों को रोकना पड़ा।
बागपत-बड़ौत-खेकड़ा विकास प्राधिकरण का गठन हुए वर्ष 2008 में हुआ था, लेकिन यहां प्राधिकरण की तरफ से एक भी योजना तैयार नहीं की गई। विकास प्राधिकरण केवल नक्शे पास करने तक ही सीमित है। इसको देखते हुए ही विकास प्राधिकरण ने आवासीय कॉलोनी विकसित करने की योजना तैयार की। इसके लिए मेरठ में कमिश्नर की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रस्ताव रखा गया तो वहां से मंजूरी मिल गई।
अधिकारियों को काफी प्रयास के बाद इकोनॉमिक कॉरिडोर के पास जमीन मिली जो कॉरिडोर के मेरठ-बागपत नेशनल हाईवे पर बनाए जाने वाले गोल चक्कर के पास है। यह 8.47 हेक्टेयर जमीन है, जिसपर कॉलोनी विकसित करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया। जिसको शासन से मंजूरी मिलने के साथ जमीन खरीदने के लिए बजट की किस्त के 20 करोड़ रुपये भी मिल गए।
विकास प्राधिकरण ने 53 किसानों में सात की जमीनों के बैनामे भी करा लिए मगर अब बैनामों की प्रक्रिया को रोकना पड़ा। इसका कारण यह है कि चार किसानों ने जमीन पर एक-एक लाख रुपये का लोन लिया हुआ है और वह लोन जमा करने के बाद ही बैनामे कराए जा सकते हैं।
- अधिकारी दस दिन से कर रहे लोन जमा करने का आग्रह
जिन किसानों ने जमीन पर लोन लिया हुआ है। अधिकारी उनसे दस दिन से लोन जमा करने का आग्रह कर रहे हैं। इसके बाद भी किसान अभी तक लोन जमा नहीं कर सके और इस कारण कॉलोनी विकसित करने की कार्रवाई में देरी हो रही है।
आवासीय कॉलोनी की जमीन के बैनामे जल्द ही दोबारा से शुरू कराए जाएंगे। चार किसानों ने अपनी जमीन पर लोन लिया हुआ है और वह जल्द ही उसे जमा करने के लिए कह रहे हैं। उनके जमा होते ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। - अतुल शर्मा, सहायक अभियंता विकास प्राधिकरण