बागपत। सड़क का मुआवजा निर्धारित कराने के लिए प्रशासन द्वारा चार गांवों में की गई बैठक बेनतीजा रही। किसानों ने 2007 के रेट की जगह वर्तमान दरों से भुगतान दिए जाने की मांग की। प्रशासन इसकी रिपोर्ट शासन को भेजेगा।
बुधवार को अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता बालेंद्र वार्ष्णेय और विभाग के अन्य अधिकारियों ने सबसे पहले छपरौली में किसानों से वार्ता की। लगभग एक घंटे तक हुई माथापच्ची में कोई नतीजा नहीं निकल सका। किसानों ने 2007 में तय किए गए भूमि के मुआवजे की जगह वर्तमान दरों पर भूमि का मुआवजा दिलाए जाने की मांग की। छपरौली के बाद रठौड़ा फिर सूप और शाम तीन बजे के बाद बिराल में भी किसानों के साथ मुआवजे को लेकर चर्चा की। लेकिन कहीं भी बात नहीं बन पाई। किसानों ने उस समय के रेट से मुआवजा लेने से इंकार कर दिया। अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने बताया कि बिराल से छपरौली तक की सड़क में चारों गांवों के लगभग 670 किसानों की भूमि गई है। 2007 में मुआवजा तय किया गया था और 2010 में मुआवजा दिया गया। लेकिन इनमें से लगभग 400 लोगाें ने ही मुआवजा लिया, शेष किसान वर्तमान दरों पर मुआवजा लेने की मांग पर अड़े रहे। बाद में मामला हाईकोर्ट भी पहुंच गया। उन्होंने बताया कि चारों गांवों की बैठकों के संबंध में रिपोर्ट शासन को भेज दी जाएगी।