बागपत। पाकिस्तान में हमारी बहन-बेटियों की इज्जत सुरक्षित नहीं। हमारे बच्चों को स्कूलों में पढ़ने नहीं दिया जाता। हम अपने तीज-त्योहार नहीं मना सकते। वहां हमारी जिंदगी मौत से भी बदतर है। यह दर्द बयां किया है पाकिस्तान से आए 16 हिन्दुओं ने। उनका कहना है कि पाकिस्तान में मुस्लिमों के अत्याचारों के चलते वहां हिन्दुओं की आबादी कम होती जा रही है। देश के विभाजन के समय लगभग दो करोड़ हिन्दू थे, जबकि अब सिर्फ 30 लाख बचे हैं। वे भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि वे मर जाएंगे लेकिन वापस पाकिस्तान नहीं जाएंगे।
ये लोग पाकिस्तान के सिंध प्रांत के हैदराबाद में रहने वाले कृष्णमल्ल के साथ बागपत पहुंचे। उन्होंने दिल्ली रोड स्थित आशीर्वाद मैरिज होम में मीडिया को बताया कि भारत में हिंदू-मुस्लिम भाईचारे के साथ रहते हैं लेकिन पाकिस्तान में ऐसा नहीं है। वहां पर हिंदुओं का सम्मान नहीं है। वहां मुसलमान उन पर अत्याचार करते हैं, जबरन धर्म परिवर्तन कराते है। लड़कियों से जबरन शादी कर लेते है। स्कूलों में उन्हें पढ़ने भी नहीं दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि पिछले छह माह के अंदर वहां से करीब 200 लोग लंबी अवधि के वीजा पर आकर हरियाणा और दिल्ली में रह रहे हैं। हरियाणा के विजवासन निवासी नाहर सिंह उनकी लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से अपने परिवार को पाकिस्तान से मुक्त कराने की मांग की।
बागपत के लोगों की मदद
शहर के रामनिवास, राकेश आर्य, संजीव, भूपेंद्र चौहान, राकेश, बाबू, महेंद्र ने 29 हजार नगद, कपडे़ और अन्य सामान देकर पाकिस्तान से आए हिन्दुओं मद्द की। उनसे कहा गया है कि अगर चाहें तो बागपत में रह सकते हैं।
ये लोग आए हैं
पाकिस्तान से बागपत आने वालों में कृष्णमल्ल, नारायणदास, हरिराम, रूपचंद, सुन्हेरी, दयावती, सोनारी, रेशमा, गोमती, माला, राधा, सरस्वती, आरती, मीनाक्षी, चंपा, प्रेमीबाई शामिल हैं।