बागपत। तूफानी रफ्तार से आती काले रंग की वर्ना कार राष्ट्रवंदना चौक पर तेजी से रुकती है। अगली खिड़की खुलती है। इसमें से निकलता है लंबे बालों वाला हट्टा कट्टा गोरा चिट्टा नौजवान। उसके बायें हाथ में है सोने का मोटा कड़ा और दाएं में सलेटी रंग की पिस्टल। उसे देखते ही पुलिस चिल्लाती है- ये ही है, भागो इसके पीछे, पकड़ लो, जाने ना पाए। इसके बाद 10 मिनट तक एकदम फिल्मी स्टाइल में रोंगटे खड़े कर देने वाला जो घटनाक्रम होता है, उसे देखकर सांसे थम जाती हैं। लोग सहम जाते हैं। फिर एक गोली चलती है और नौजवान की लाश गिर पड़ती है। चश्मदीदों के मुताबिक पूरा वाकया इस तरह से हुआ ....
--। सीन एक : पौने पांच बजे गोरीपुर की तरफ जाते एसओ आरके सिंह यादव की नजर दिल्ली से लूटी गई वर्ना कार पर पड़ी। उन्होंने अपनी जीप मोड़कर उसके पीछे लगा दी। वायरलेस से मेसेज मिलते ही राष्ट्रवंदना चौक पर पुलिस ने बैरियर और गाड़ियां लगाकर नाकाबंदी कर दी।
--। सीन दो : चार बजकर चालीस मिनट पर वर्ना कार चौराहे पर पहुंची। पुलिस कार पकड़ने को दौड़ी। इसे लूटकर लाया नौजवान कार छोड़ हाथ में पिस्टल लेकर बड़ौत रोड की ओर दौड़ पड़ा। लोगों ने समझा पुलिस एनकाउंटर कर रही है। दुकानों के शटर गिरने लगे। अफरातफरी मच गई। वाहन जहां के तहां खड़े हो गए।
--। सीन तीन : पोस्टमार्टम हाउस के पास पुलिस ने हाईवे पर दोनों ओर से बदमाश को घेर लिया। उसने पुलिस पर फायर किया, लेकिन गोली निशाना चूक गई। पुलिस वाले उलटे पांव भाग लिए। पास खड़े लोग जमीन पर लेट गए। एक मिनट बाद पुलिस फिर से उसके पीछे दौड़ी। वह जैन मुहल्ला के बाहर स्पेयर पार्ट्स की दुकान के सामने जाकर रुक गया।
--। सीन चार : पांच बजने में एक दो मिनट ही बाकी थे। बदमाश पुलिस से बोला, पास मत आना। उसने पिस्टल कनपटी पर लगा दी। पुलिस चिल्लाई, गोली मत चलाना। उसने चारों ओर देखा। अगले ही पल उसने पिस्टल कनपटी से सटा ली और आंखें बंद करके गोली चला दी। धमाके के साथ ही एक ओर उसका भेजा गिरा। खून के फव्वारे छूटे और वह नीचे गिर पड़ा। खून ही खून हो गया वहां। वहीं उसका दम निकल गया।
--। सीन पांच : उसकी लाश गिरते ही पुलिस उसके पास पहुंची। थोड़ी ही देर में हजारों की भीड़ लग गई। क्या क्या, कौन था, तमाम सवाल होने लगे। पुलिस उसकी लाश अस्पताल और कार को थाने पर ले गई।
--। इन लोगों ने देखा घटनाक्रम
बागपत। सपा नेता शफीक सलमानी, रालोद नेता अमित जैन, पुराना कस्बा के मनीष, मिस्त्री जान मोहम्मद और गुलजार ने यह घटनाक्रम अपनी आंखों से देखा। उन्होंने मीडिया को इसके बारे में जानकारी दी।