बागपत। काठा नाव हादसे के बाद भी किसान जान खतरे में डालकर यमुना पार करके अपने खेतों में जा रहे हैं। अब किसान और मजदूर निर्माणाधीन ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे के सरियों पर चढ़कर यमुना पार कर रहे है। किसानों ने कहा जिला प्रशासन यमुना पार करने की कोई व्यवस्था नहीं कर रहा है। हम लोगों को मजबूरी में इस तरह से खेतों में जाना पड़ रहा है।
काठा, मवी कलां, नंगला बहलोलपुर सहित कई गांवों के किसानों की हजारों बीघा जमीन यमुना पार है। किसान और मजदूर खेतों में काम करने के लिए यमुना पार करके खेतों में काम करने के लिए जाते हैं। यमुना में पानी आने के बाद नाव से जाना शुरू कर दिया था। 14 सितंबर को काठा गांव में नाव हादसा होने से हर कोई दहशत में आ गया । किसानों ने अपने खेतों में भी जाना बंद कर दिया । अब धीरे-धीरे किसानों ने अपने खेतों में जाना शुरू कर दिया है। इसके लिए किसान और मजदूर शॉटकट रास्ता बना रहे हैं। मवी कलां गांव के खेतों से ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे निकाला जा रहा है। इसका निर्माण कार्य चल रहा है। किसानों सहित अन्य लोग सरिया पर चढ़कर एक्सप्रेस वे पर चढ़ते हैं, इसके बाद अपने खेतों में जाते हैं। किसान अब भी जान को खतरे में डाल रहे हैं। इन सरियों पर चढ़ते समय कभी भी हादसा हो सकता है।
लोहे की सीढ़ी का भी करते हैं प्रयोग
बागपत। एक्सप्रेस-वे पर चढ़ने के लिए मिस्त्रियों की सीढ़ी का भी किसान इस्तेमाल करते हैं। इनको सीढ़ी उस समय मिलती है, जब मिस्त्री काम नहीं करते हैं।
निवाड़ा पुल के रास्ते जाए
तो चलना पड़ता है 35 किमी
बागपत। किसानों ने कहा यदि निवाड़ा पुल के रास्ते अपने खेतों में जाए तो उनको 35 किमी चलना पड़ता है। इस कारण आने-जाने में करीब 70 किमी की दूरी तय करनी पड़ेगी। ऐसे स्थिति में लोग यमुना पार करने के लिए शॉट कट रास्ता अपनाते हैं।
फसल हो रही बर्बाद, भूखे मर
रहे पशु, खेतों में जाना मजबूरी
बागपत। काठा गांव के किसान मदन, सुभाष, इस्तिकार, मुत्याज, चमन, जितेंद्र आदि ने कहा गांव की काफी जमीन यमुना पार है। खेतों में न जाने से फसल बर्बाद हो रही है और चारा न मिलने से पशु भूखे मरने के कगार पर है। ऐसे स्थिति में उनको मजबूरी में खेतों में जाना पड़ रहा है। प्रशासन यमुना पार करने की कोई व्यवस्था नहीं कर रहा है। हालांकि प्रशासन की टीम व्यवस्था करने के लिए प्वाइंट तलाश कर रही है, जहां से लोगों का नदी से आवागमन होता है।