अग्रवाल मंडी टटीरी (बागपत)। आर्य समाज मंदिर में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया। इसमें कर्मवीर आर्य पुरोहित और सुरेश चंद आर्य यज्ञमान रहे। कर्मवीर आर्य ने कहा कि व्यक्ति को अपने जीवन में धर्म के मार्ग चलकर ही उन्नति प्राप्त कर सकता है। व्यक्ति को धर्म मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। कृष्ण गोपाल आर्य ने कहा कि स्वामी श्रद्धानंद का बलिदान दिवस है, वह देश के शिक्षाविद्, स्वतंत्रता सेनानी और आर्य समाज के संन्यासी थे। उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार किया। श्रद्धानंद उन महान राष्ट्रभक्त सन्यासियों में अग्रणी थे, जिन्होंने अपना जीवन स्वाधीनता स्वराज शिक्षा और वैदिक धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित किया। उन्होंने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय और शैक्षणिक संस्थाओं की स्थापना की। हिंदू समाज को संगठित किया। 1920 के दशक में शुद्धि आंदोलन में अहम भूमिका अदा की। शांति पाठ के साथ सत्संग का समापन किया। इसमें मनोज आर्य एडवोकेट, संचालक आर्य वीर दल मनोज कुमार, सतीश आर्य, शीशपाल, शकुंतला आर्या, निशा आर्या, अभिनव, विक्रम, राकेश, राजेंद्र शर्मा, प्रमोद आर्य, संदीप, जयपाल आदि मौजूद रहे।
युवाओं को भेंट की सत्यार्थ प्रकाश
अग्रवाल मंडी टटीरी (बागपत)। दुर्गा अतिथि भवन में राष्ट्रीय आर्य निर्मात्री सभा के चल रहे लघु गुरुकुल का समापन हो गया। आचार्य अश्वनी ने युवाओं को व्यसन छोड़कर राष्ट्र सेवा में समर्पित रहने के लिए प्रेरित किया। व्यसन मुक्त युवा ही सशक्त राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। आचार्य राजेश ने युवाओं को यज्ञोपवीत धारण करवाया। राष्ट्र के प्रति दायित्वों का स्मरण कराया। सत्यार्थ प्रकाश भेंट की। आर्य सहदेव, लोकेंद्र, उपेंद्र, रोबिन, अमित, मनोज, वीर सिंह, रक्षम, सुखवीर आदि का सहयोग रहा।