बागपत। औद्योगिक इकाइयों में परिशोधन यंत्र न होने से नदियों का पानी दूषित हो रहा है। भूगर्भ जल तक प्रभावित है। इसी वजह से क्षेत्र के लोग कैंसर जैसे रोगों से ग्रस्त है। कृष्णा और पूर्वांचल की आमी नदी के पानी की जांच होगी। इसके लिए दो टीम गठित की। इसमें दो-दो सदस्य होंगे। पर्यावरण विभाग के अधिकारियों को टीम में शामिल किया।
बागपत जिला के एक छोर पर हिंडन और दूसरे पर यमुना है। वहीं बिनौली क्षेत्र में कृष्ण और हिंडन नदी का संगम है। यमुना तो बरसाती नदी बन गई, वहीं कृष्ण और हिंडन के पानी लोगों के लिए काल बन रहा है। सैकड़ों लोग बीमार है। इसका कारण फैक्ट्रियों का केमिकल युक्त पानी नदियों में प्रवाहित होना है। इन पर प्रतिबंध नहीं लगा तो लोगों के जीना मुहाल हो जाएगा। दूषित हिंडन का प्रकरण शासन तो पहुंचा। इसके पानी की जांच हुई तो पानी जहरीला मिला। मेरठ और सहारनपुर मंडल के 55 से अधिक गांवों का पानी दूषित हो गया है। कृष्णा नदी का भी यह ही हाल है। लोग पानी से त्रस्त हैं। इसकी प्रमुख वजह है औद्योगिक इकाइयों में परिशोधन यंत्रों का न होना। प्रदेश के सात जनपदों से कृष्णा और आमी नदी गुजर रही है। यहां पर दूषित पानी से सैकड़ों लोगों की जाने जा चुकी है। शासन ने दूषित दोनों नदियों का संज्ञान लिया। इसके लिए नदियों के पानी की जांच के लिए दो टीम गठित कर दी है। एक टीम तो कृष्णा और एक टीम आमी नदी के पानी की जांच करेगी। इसमें दो-दो सदस्य होंगे और इस टीम में पर्यावरण विभाग के अधिकारियों को शामिल किया। कृष्णा नदी के पानी की जांच करने के लिए सचिव सुरेश चंद और पर्यावरण अभियंता प्रदीप शर्मा, आमी नदी की जांच के लिए पर्यावरण अभियंता टीयू खान व स्वामीनाथ राम को शामिल किया। यह टीम बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, गोरखपुर, बस्ती और संत कबीरनगर की नदियों के पानी की जांच करके शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। विशेष सचिव ने इन जनपदों के डीएम को पत्र भेजकर टीम का सहयोग करने के लिए कहा है, ताकि पानी की जांच समय से हो सकें, क्योंकि इसकी जांच जरूरी है।
गंगा संरक्षण प्रबंधन कानून बनाया जाए : राजेंद्र सिंह
बागपत। मैग्सेसे पुरस्कार प्राप्त जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने कहा कि प्रोफेसर जीडी अग्रवाल ने गंगा को अविरल बनाने के लिए अभियान चलाया। इसके लिए तपस्या कर रहे हैं। सरकार से मांग कर रहे हैं कि गंगा संरक्षण प्रबंधन कानून बनाया जाए। पूर्व की सरकार ने भागीरथी पर आधे से अधिक निर्मित लुहारी नागपाला, पलामनेरी और भैरों घाटी का निर्माण रोक कर हमेशा के लिए रद्द कर दिया। गंगा की अन्य धाराओं पर प्रस्तावित 250 बांधों पर रोक लगा दी । वहीं गंगोत्री से लेकर उत्तरकाशी तक भागीरथी नदी को पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्र घोषित कर भागीरथी की अविरलता निर्मलता सुनिश्चित की। इसी प्रकार गंगा के लिए यह कानून बहुत जरूरी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से इस पर कार्य करने की अपील की।