बागपत। करोड़ों की लागत से बने बागपत के अधिकांश उपकेंद्र बीमार हैं। स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था के कारण दर्जनों उपकेंद्र खंडहर में तब्दील हो गए हैं। सीएमओ डॉ सुषमा चंद्रा का कहना है कि अब उनकी स्थिति में सुधार होने की उम्मीद जगी है। उच्चाधिकारियों से बातचीत की गई है।
देहात की महिलाओं और बच्चों की स्वास्थ्य की देखरेख के लिए 200 स्वास्थ्य उपकेंद्र बना रखे हैं। जहां पर एएनएम के द्वारा टीकाकरण कराया जाता है, लेकिन यहां के अधिकांश केंद्रों की हालत खराब है। वहां पर टीकाकरण तो दूर उनको एएनएम देखने तक नहीं जा रहा है। किसी केंद्र में कूड़ा डाला जा रहा है तो किसी में उपले बनाए जा रहे हैं। निवाड़ा के उपकेंद्र के पास जलभराव हो रहा है। उसकी दयनीय हालत है। इसी तरह गढ़ी कलंजरी गांव के केंद्र में उपले बनाए जा रहे हैं। अधिकांश केंद्र की हालत यहीं है। सीएमओ ने खुद निरीक्षण किया तो उनको इसका पता चला। अब उनके द्वारा इनकी मरम्मत करने की तैयारी चल रही है। सीएमओ डॉ. सुषमा चंद्रा ने कहा कई उपकेंद्रों की हालत खराब हो रही है। उसकी मरम्मत कराने के लिए निर्माण करने वाली संस्था से निरीक्षण कर खर्च का ब्योरा देने के लिए कहा गया था।
उपकेंद्रों के निर्माण में हुआ घोटाला
बागपत। अधिकांश उपकेंद्रों के निर्माण की रकम ग्राम प्रधान और एएनएम के संयुक्त खाते में आ गई। उनके द्वारा ही निर्माण कराया गया। कई उपकेंद्र समय से पहले ही जर्जर हो गए हैं। सीएमओ ने कहा जांच करने पर पता चला निर्माण कार्य में घटिया सामग्री लगी है। असारा गांव में दो उपकेंद्र बने हैं। इनमें से एक की हालत खराब है। इनकी जांच की जा रही है।
9-12 लाख में तैयार हुआ था एक उपकेंद्र
बागपत। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक एक उपकेंद्र 9-12 लाख रुपये में तैयार हुआ। जो पांच हजार की आदमी पर बनाए। एक उप केंद्र पर एक एएनएम की तैनाती है। बागपत में 15 उपकेंद्रों की ओर आवश्यकता है। उन स्थानों पर किराये पर दुकान या मकान ले रखा है। वहीं पर एएमए टीकाकरण करती है।