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टीवी चैनलों ने समाप्त की त्यौहारों की परंपरा

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बड़ौत (बागपत)।
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हरियाली तीज पर जगह-जगह झूले डलते थे। महिलाएं झूलों पर गीत गाकर हरियाली तीज बनाती थी, लेकिन अब यह देखने को नहीं मिल रहा है। जानकारों का मानना है कि टीवी चैनलों पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों ने त्योहारों को मनाने के तौर तरीकों को भी बदल दिया है।
वर्षों पहले हरियाली तीज पर घरों में और गांवों के पेड़ों पर झूले डालकर महिलाएं झूले का आनंद लेती थी। इकट्ठा होकर तीज के गीत गाती थी। झूलने के बाद छोटी बच्चियां दूल्हा-दुल्हन का रूप धर कर ढोल के साथ गांव व नगर के नजदीक बगीचों में संटी खेलती थी और लुत्फ उठाती थी। लेकिन, अब टीवी चैनलों ने इन तौर तरीकों को बदल दिया है। अब ज्यादातर महिलाएं घर पर ही त्योहारों का टीवी पर आनंद उठाती है। हरियाली तीज पर भी बुधवार को ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला और महिला टीवी चैनल पर हरियाली तीज के कार्यक्रम देखने में मस्त रही।
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वहीं, दूसरी ओर हरियाली तीज पर महिलाओं ने हाथों पर मेंहदी लगाकर घर में लजीज पकवान बनाए, लेकिन झूलें का आनंद उन्हें नहीं मिला। गांव में इक्का-दुक्का स्थानों पर जरूर महिलाएं झूला झूलती पाई गई, लेकिन उनमें पहले जैसा उत्साह नहीं था।
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