बिनौली (बागपत)। धनौरा सिल्वरनगर में श्रीमद्भागवत कथा के सातवें दिन रविवार को बाल साध्वी राधा देवी ने रुक्मिणी विवाह और सुदामा चरित्र को सुनाते हुए कहा कि सच्चा प्रेम असंभव को भी संभव कर सकता है।
रुक्मिणी ने कभी भगवान कृष्ण को देखा नहीं था केवल महिमा सुनी थी और उसी से वह कृष्ण को अपना पति मान बैठी। उसका भाई रुक्मी उसकी शादी शिशुपाल से करना चाहता था। परंतु रुक्मिणी के साथ समस्या थी कि वह तो कृष्ण को जानती भी नही थी। रुक्मिणी ने रो-रो कर भगवान को पुकारा भगवान ने अपने भक्त की अर्जी को स्वीकारा ओर रुक्मिणी को वहां से लेकर आए और उसकी इच्छा पूरी की। उधर सुदामा भी भगवान को मित्र रूप में मानता था और भगवान ने मित्र रूप में ही उसको अपना लिया। उन्होंने कहा कि जब हम सत्य की ओर चलेंगे, तो परमात्मा हमारी ओर चलेगा क्योंकि सत ही तो परमात्मा है। मनुष्य का कर्तव्य बनता है कि अच्छी बातों को ही चिंतन में लाए क्योंकि जब हम दूसरों के सद्गुणों का चिंतन करते रहेंगे तो हमारा ध्यान भी सद्गुणों में ही बना रहेगा।