बड़ौत (बागपत)।
बावली गांव के पश्चिमी छोर पर स्थित ग्राम देवता और खटकड़ बाबा मंदिर के निकटवर्ती रेहड़ा टीले का शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन और संस्थान के शोधार्थी हर्ष देव ने पुरातत्व सर्वेक्षण किया। इस दौरान टीम को बावली गांव के इस पुरातत्व स्थल की ऊपरी सतह से ही लाल मृदभंड़ों के अवशेष प्राप्त हुए हैं।
पुरातत्व सर्वेक्षण मेें प्राप्त पुरातत्व अवशेष और परिणामों की जानकारी देते हुए शहजाद राय शोध संस्थान के निदेशक अमित राय जैन ने बताया कि कुषाण काल की मानव बस्ती से संबंध रखने वाले पुरातत्व अवशेष गांव बावली से प्राप्त हुए हैं। पुरातत्व सर्वेक्षण मेें प्राप्त घरेलू चूल्हा, कोयल, मानव, अस्थियां, सीप, प्राचीन कुआं और लौह अयस्क के अवशेष की साफ सफाई और अध्ययन के पश्चात यह दावा है कि बावली गांव के इस प्राचीन स्थल पर करीब दो हजार साल पहले मानव बस्ती थी। इस पुरातत्व स्थल के ही निकट दूसरे टीले से कुषाण कालीन घरों को दीवारों मेें प्रयुक्त हुई। प्राचीन ईंटों की भी प्राप्ति यह सिद्ध करती है कि यहां कुषाण कालीन मानव बस्ती थी।
अवैध मिट्टी खनन से जमीदोज हुई सभ्यता
बड़ौत। ग्रामीणों की नासमझी के कारण गांव में के पश्चिमी छोर पर निरंतर भराव हेतु मिट्टी का अवैध खनन किया जा रहा है। इस कारण ग्राम पंचायत की संपत्ति पर स्थित यह प्राचीन सभ्यता का केंद्र करीब 90 प्रतिशत तक नष्ट हो चुका है। इस स्थल पर होने वाले मिट्टी के अवैध खनन को रोक लगाने के लिए अमित राय जैन डीएम से मुलाकात करेंगे और डीएम को स्थिति से अवगत कराएंगे।