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दो हफ्ते में सामने आएगा जमीन का सच

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बागपत। डेरा सच्चा सौदा के बरनावा आश्रम की जमीन का सच सामने आने में दो सप्ताह का समय लगेगा। डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने कहा टीम गठित की जा चुकी है। विभागों से उनकी जमीन पर कब्जे की रिपोर्ट मांगी है। यदि वास्तव में कब्जा है है तो एंटी भूमाफिया टीम अतिक्रमण हटाकर संबंधित विभाग को कब्जा दिलाएगी।
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बरनावा आश्रम की 15 अगस्त 1980 से स्थापना के बाद से कई बार रह रहकर वन विभाग की जमीन पर कब्जे का जिक्र उठता रहा है, लेकिन कभी न तो जांच हुई और न ही वन विभाग ने कोई विभागीय कार्रवाई की। डेरामुखी गुरमीत राम रहीम सिंह के जेल जाते ही एकाएक प्रशासन ने बरनावा आश्रम में जमीन के प्रकरण के लिए टीम गठित की। एसडीएम बड़ौत अरविंद कुमार ने चकबंदी और वन विभाग की टीम बनाई है। उधर, वन विभाग की टीम ने अचानक मौके पर पहुंचकर पैमाइश भी शुरू कर दी। वन विभाग के अधिकारियों ने माना है कि प्राथमिक जांच में उन्हें जमीन पर कब्जा लग रहा है, इसकी विस्तृत पैमाइश जरूरी है। डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने बुधवार को बताया डेरा सच्चा सौदा के बरनावा आश्रम की भूमि की पैमाइश के लिए टीम गठित हो चुकी है, दो सप्ताह में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगी। संयुक्त टीम को इस अवधि में अपनी रिपोर्ट देनी है।


विभागों से मांगी रिपोर्ट
बागपत। एसडीएम बड़ौत अरविंद कुमार ने कहा ग्राम समाज, वन विभाग समेत अन्य विभागों से रिपोर्ट मांगी है। जमीन पर कब्जे के संबंध में जिस विभाग की रिपोर्ट मिलेगी, इसके बाद एंटी भू माफिया टीम को मौके पर भेजा जाएगा। बरनावा ही नहीं, यह अभियान पूरे तहसील क्षेत्र में चलाया जाएगा।
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कैसे बाहर आएगा पर्दे के पीछे का सच
बागपत। डेरामुखी गुरमीत राम रहीम सिंह के जेल जाते ही बरनावा आश्रम क्षेत्र के कुछ लोग दबी जमाने से तीन दशक पुराने मामले उजागर करने लगे हैं, लेकिन यह लोग न तो प्रशासन से शिकायत कर रहे हैं और न ही पुलिस से। एक परिवार ने बताया उनके परिवार का युवक गायब हो गया। उन पर इतना दबाव बनाया कि मजबूरन उन्हें अपनी जमीन बेचनी पड़ गई। हालांकि इस परिवार के अधिकतर सदस्य गांव छोड़ चुके हैं और कहते हैं वह किसी पचड़े में नहीं पड़ना चाहते हैं। इस परिवार का वर्ष 1990 से लापता युवक फिर कभी अपने घर नहीं लौटा।


लाश मिलने के राज में हकीकत क्या
बागपत। यह महज संयोग है या कोई राज छिपा है। बरनावा में रूहानी सत्संग के दो दिन बाद वन क्षेत्र में लाश मिलती । ऐसा एक या दो बार नहीं, बल्कि कई बार हुआ। शिनाख्त भी होती, पुलिस भी पहुंचती और परिजन भी, लेकिन कभी किसी ने न तो शिकायत की और न ही कोई कार्रवाई हुई। एक बार महिला और दो बार पुरुषों की लाश वन क्षेत्र में मिली , इनकी मौत हमेशा के लिए राज बन गई। हकीकत यह भी है कि डेरामुखी को सजा होने से पहले किसी ने आश्रम की बात काटने की हिम्मत कभी नहीं की।

महिला उत्पीड़न का वीडियो वायरल
बागपत। बरनावा क्षेत्र के शेखपुरा गांव की बुजुर्ग महिला का वीडियो वायरल हुआ है। इसमें वह घूंघट में डेरामुखी के अनुयायियों पर महिला उत्पीड़न का आरोप लगा रही है। वह कहती हैं कि उत्पीड़न का यह मामला करीब 30 साल पुराना है। उसके पति के साथ मारपीट की । जिन महिलाओं का उत्पीड़न किया, वह हमेशा चुप रही और अब इस दुनिया में नहीं है। हालांकि कुछ लोग बताते हैं कि ऐसे लोग सामने आ रहे हैं, जो पहले डेरे को अपनी जमीन अपनी मर्जी से बेच चुके हैं, लेकिन अब डेरामुखी के जेल जाने पर गलत आरोप लगा रहे हैं। दूसरी तरफ डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने कहा किसी भी महिला या पुरुष ने किसी तरह के उत्पीड़न की शिकायत नहीं की है। यदि कोई शिकायत मिलती है तो निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि कोई दोषी मिलता है तो कठोर कार्रवाई होगी, लेकिन शेखपुरा गांव की किसी महिला ने उन्हें शिकायत नहीं की है।

डेरे में महिलाओं का शोषण, पलायन की मजबूरी
बागपत। डेरामुखी राम रहीम सिंह के जेल जाने के बाद बरनावा क्षेत्र की एक बुजुर्ग महिला ने अपने गांव के प्रधान के सामने कहा कि डेरे के आसपास जंगल जाने वाली महिलाओं का उत्पीड़न किया जाता था। डेरे के सुरक्षाकर्मी महिलाओं को खींचकर ले जाते थे, अत्याचार भी करते थे। गरीब तबके की इन महिलाओं ने कभी अपने ऊपर हुए अत्याचार का जिक्र नहीं किया। दिल्ली में रहने वाली इस महिला का कहना है कि जिन महिलाओं पर उत्पीड़न हुआ, वह मर चुकी हैं। उधर, गांव के कुछ लोग दबी जबान से कह रहे हैं कि उनकी जमीन औने-पौने दाम में खरीदी गई। प्रधान के पति का कहना है कि अगर ग्रामीण कानूनी लड़ाई लड़ते हैं तो वह साथ देने के लिए तैयार हैं। कुछ लोग गांव से पलायन कर गए। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि एकाएक तीस साल बाद मामला सामने आया है। पहले कभी इस तरह की शिकायत नहीं की गई।
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