दो सितंबर को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रहेगा शुभ
बागपत। ज्योतिषाचार्य पं. राजकुमार शास्त्री ने बताया कि पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का अवतार भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी के दिन हुआ था। दो सिंतबर को 8:48 बजे अष्टमी तिथि का प्रवेश हो जाएगा। इसी दिन रोहिणी नक्षत्र भी प्रवेश कर जाएगा। चंद्रमा भी वृष राशि में रहेगा। इस लिए जन्माष्टमी का पर्व दो सितंबर को होना शुभ रहेगा।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि ऋषि व्यास, नारद ऋषियों के अनुसार सप्तमी से मुक्त अष्टमी पर ही वृत पूजन उत्तम एवं शुभ फलदायक है। श्रीमद्भागवत पुराण, भविष्ठ, अग्नि, विष्णु आदि पुराणों के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का अवतार भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी के समय पर हुआ था। इन सबका संयोग एक दिन में मिलना दुर्लभ संयोग होता है। इस कारण जन्माष्टमी का पर्व दो दिन मनाया जाता है। इस बार भी ऐसा ही है। शास्त्रों में लिखा है भगवान कृष्ण का जन्म अर्ध रात्रि व्यापिनी अष्टमी को हुआ था। वृत का कर्मकाल अर्धरात्रि ही है। इस लिए वर्त रखने के लिए अष्टमी का होना जरूरी है। अर्ध रात्रि के समय नवमी तिथि का कोई औचित्य नहीं है। इस बार दो सितंबर को रात्रि में 8:48 से अष्टमी तिथि का प्रवेश हो जाएगा। इसी दिन 8:49 बजे रोहिणी नक्षत्र का भी प्रवेश होगा। चंद्रमा वृष राशि में रहेगा। जन्माष्टमी का व्रत पूजन दो सितंबर को ही होना शुभ है। तीन सितंबर को रात्रि में 7:21 से नवमी तिथि लग जाएगी, रोहिणी नक्ष की भी 8:20 पर समाप्त हो जाएगा। इस दिन व्रत रखना उचित नहीं होगा।