बागपत। जकार्ता में चल रहे एशियाई खेलों में मेरठ के तीन निशानेबाजों ने दुनिया के सामने अपना लोहा मनवा लिया है। दिलचस्प बात यह है कि पिस्टल शूटर सौरभ चौधरी की उम्र सिर्फ 16 और ट्रैप शूटर शार्दुल विहान की उम्र केवल 15 साल है। दोनों ने पदक जीतकर चयनकर्ताओं का भरोसा भी कायम रखा। रवि कुमार की उम्र भी ज्यादा नहीं है। भारतीय निशानेबाजी दल में इस बार 21 साल से कम उम्र के छह निशानेबाज शामिल किए। नेशनल राइफल एसोसिएशन (एनआरएआई) के चयनकर्ता अर्जुन अवार्डी ट्रैप शूटर मुराद अली खान कहते हैं कि आने वाले समय में जूनियर खिलाड़ी और अधिक निखरा प्रदर्शन करेंगे। प्रस्तुत है एशियाई खेलों में जूनियर खिलाड़ियों के चयन और प्रदर्शन पर मुराद अली खान से बातचीत के अंश....
सवाल : जूनियर निशानेबाज सीनियर खिलाड़ियों के बीच बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। जूनियरों को एशियाई खेलों के अलावा विश्व चैंपियनशिप के लिए चुना गया है, क्या चयन पॉलिसी बदली है। आखिर इसकी वजह क्या है।
जवाब : चयन नीति में बदलाव किए गए । जूनियर निशानेबाजों के प्रशिक्षण कार्यक्रम पर ध्यान केंद्रित किया, जो पहले नहीं था। जिन खिलाड़ियों ने अच्छा प्रदर्शन किया, उनका चयन सीनियर टीम में किया। परिणाम देश के सामने हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि भविष्य की प्रतियोगिताओं में बेहतर परिणाम मिलेंगे। नए-नए खिलाड़ी सामने आएंगे और इसी तरह पदक जीतेंगे।
सवाल : टोक्यो ओलंपिक 2020 के लिए क्या नई तैयारी की जा रही है।
जवाब : जूनियर और सीनियर खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के कार्यक्रम तैयार किए गए हैं। पेशवर और पुराने निशानेबाजों से इनपुट लिया जा रहा है। एशियाई खेल, विश्व चैंपियनशिप और यूथ ओलंपिक जैसी प्रतियोगिताएं भी खिलाड़ियों को ओलंपिक के लिए तैयार करने में मदद करती हैं। जूनियर खिलाड़ियंों ने भाग लेकर पदक जीते, अगर बेहतर प्रदर्शन बरकरार रखा तो यही अनुभव ओलंपिक जैसे खेलों में खिलाड़ियों के बड़ा काम आएगा।
सवाल : खिलाड़ियों के प्रदर्शन के लिए प्रशिक्षक किस हद तक जिम्मेदार होते हैं। प्रशिक्षकों की नतीजों में क्या भूमिका होती है।
जवाब : युवा खिलाड़ियों को बेहतर मौके दिए जा रहे हैं। सिर्फ युवा ही नहीं सीनियर खिलाड़ियों के प्रदर्शन की निगरानी एनआरएआई करता है। कोच निशानेबाजों की प्रगति के लिए भी उत्तरदायी होते हैं, इसकी नियमित आधार पर निगरानी शुरू की गई है। एनआरएआई की मंशा सकारात्मक सोच को बढ़ाकर नकारात्मक ऊर्जा को हटाने की है। यही खेल के हित में भी है।
सवाल : पश्चिम यूपी के देहात में खिलाड़ियों की भरमार है, क्या इस क्षेत्र के लिए कुछ सुविधाएं बढ़ाई जाएगी।
जवाब : पश्चिमी यूपी समेत पूरे देश में ही शूटिंग की प्रतिभाओं की कमी नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र से खेल की सुविधा और योजनाओं का लाभ दिया जाना अनिवार्य है। निशानेबाजों को आवश्यक सुविधाएं नहीं मिलने के कारण कई बार प्रतिभा निखरने से पहले ही दम तोड़ जाती है। ऐसा प्रयास किया जा रहा है कि सिर्फ पश्चिम यूपी ही नहीं बल्कि पूरे देश में कहीं भी अगर निशानेबाजी की प्रतिभा है तो उसे समय पर प्लेटफार्म और मार्गदर्शन मिलना चाहिए। इससे खेल और देश का भला होगा।
सवाल : बदलाव आया है, लेकिन अभी भी चीन, जापान, कोरिया, ईरान और इंडोनेशिया जैसे देशों के पदक एशियाई खेलों में भारत से अधिक हैं। इस स्थिति में क्या कदम उठाए जाने चाहिए।
जवाब : शूटिंग की तरह ही चयन पॉलिसी बदलनी होगी। युवा ही नहीं बल्कि प्रतिभावान युवा खिलाड़ियों पर भरोसा जताना होगा। देश के यूथ पर भरोसा किए जाने के बाद ही पदक तालिका में देश की स्थिति सुधरेगी।
इनसेट
जानिए मुराद अली खान को
बागपत। मुजफ्फरनगर के जानसठ निवासी मुराद अली खान अपने दौर के नामचीन ट्रैप शूटर हैं। वर्ष 1996 में उन्हें अर्जुन अवार्ड दिया गया। मानचेस्टर के कामनवेल्थ खेलों में स्वर्ण पदक जीता। सात बार नेशनल चैंपियन रहे। एशियाई खेलों में उनकी बंदूक ने खूब धाक जमाई। मनशेर सिंह और अनवर सुल्तान के साथ मिलकर ट्रैप शूटिंग में कई पदक जीतने में कामयाबी हासिल की। वर्तमान में वह एनआरएआई की चयन समिति के सदस्य हैं।