बागपत। मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान भड़की हिंसा में काठा गांव के युवक चांद की हत्या के मामले में आरोपी राहुल काठा को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। हत्या के तीन आरोपियों को दोषमुक्त किया गया। एडीजे स्पेशल एससी/एसटी रमेश चंद ने फैसला सुनाया।
मुजफ्फरनगर दंगे से जिले में भी तनाव के हालात बन गए थे। 20 सितंबर 2013 को कोतवाली क्षेत्र के काठा गांव निवासी मकसूद ने अपने भाई चांद (30) की हत्या का मुकदमा गांव के ही राहुल काठा पुत्र बोड़ा उर्फ ब्रहमपाल समेत चार युवकों के खिलाफ दर्ज कराया था। डीजीसी सुनील पंवार और अभियोजन पक्ष के अधिवक्ता रामकुमार तोमर ने बताया कि प्रकरण का ट्रायल एडीजे स्पेशल एससी/एसटी रमेश चंद की कोर्ट में चला। बुधवार को न्यायालय ने राहुल काठा पर धारा 364/34, 302/34, 201 एवं 404 में दोष सिद्ध करते हुए उम्रकैद और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। प्रकरण के तीन आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया गया।
क्या था मामला?
मुजफ्फरनगर में दंगे की चिंगारी से बागपत में तनाव के हालात बन गए थे। मकसूद का कहना था कि नौ सितंबर 2013 को पुरानी बैट्री खरीदने का कार्य करने वाले उसके बेटे को चांद को आरोपी युवक घर से बुलाकर बैट्री स्क्रैप देने के बहाने ले गए। इसके बाद चांद घर नहीं लौटा। बरामदगी की मांग और आरोपियों पर कार्रवाई के लिए हंगामा-प्रदर्शन किया गया। इसके करीब 11 दिन बाद चांद का शव बरामद हुआ तो पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर 20 सितंबर को मुकदमा दर्ज किया था।
मामले में आए कई मोड़
मकसूद ने भाई की हत्या में राहुल के अलावा काठा के ही सोनू और राजीव को नामजद किया था। लेकिन पुलिस जांच में ही इन्हें क्लीनचिट दे दी गई। पुलिस ने जो चार्जशीट दाखिल की उसमें राहुल पुत्र बोडा, राहुल उर्फ देवा पुत्र ऋषिपाल, विनय कुमार पुत्र जल सिंह और रोहित उर्फ रोमी पुत्र रमेश के नाम शामिल थे। कोर्ट ने राहुल उर्फ देवा पुत्र ऋषिपाल, विनय कुमार पुत्र जल सिंह और रोहित उर्फ रोमी पुत्र रमेश को दोषमुक्त करार दिया है। इसके अलावा जांच में सामने आए एक किशोर की पत्रावली मुकदमे से अलग कर दी गई। उसका प्रकरण किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।