बागपत। गंगा को बचाने गंगा में खड़े होकर जल तपस्या कर रहे प्रोफेसर जीडी अग्रवाल के जीवन को बचाने के लिए जल बिरादरी डौला और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के नाम डीएम ऋषिरेंद्र कुमार को ज्ञापन सौंपा। इसके लिए जनता से अपील की वह भी इस मुहिम से जुड़े।
जल बिरादरी के संयोजक कृष्णपाल सिंह ने बताया कि गंगा को गंदगी से मुक्ति करने के लिए प्रोफेसर जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद जी गंगा में खड़े होकर जल तपस्या कर रहे हैं। गंगा मां के साथ-साथ उनके प्राणों की रक्षा के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने अभियान चलाया। प्रदेश भर में प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपे जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने चुनाव के समय जो वायदे किए उन पर काम नहीं हो हुआ है। गंगा को अविरल बनाने का दावा किया, उस पर भी कार्रवाई नहीं हुई है। इसी से परेशान होकर उन्होंने जल समाधि लेने का प्रण लिया। सभी को उनके प्राणों को बचाने में सहयोग करना है। बताया कि पहली सरकार ने जिस प्रकार भागीरथी पर आधे से अधिक निर्मित लुहारी नागपाला, पलामनेरी और भैरों घाटी का निर्माण रोक कर हमेशा के लिए रद्द कर दिया था। गंगा की अन्य धाराओं पर प्रस्तावित 250 बांधों पर रोक लगा दी । गंगोत्री से लेकर उत्तरकाशी तक भागीरथी नदी को पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्र घोषित करके भागीरथी की अविरलता निर्मलता सुनिश्चित किया । उसी प्रकार मंदाकिनी, अलकनंदा, पिंडर नदी आदि गंगा की उप धाराओं पर बन रहे बांधों को भी रद्द किया जाए। नए प्रस्तावित बांधों पर भी रोक लगे। गंगा के जल ग्रहण क्षेत्र को पर्यावरणीय संवेदनशील क्षेत्र घोषित कराके गंगा भक्त परिषद और गंगा परिषद का गठन करें। प्रस्तावित अधिनियम ड्राफ्ट 2012 पर तुरंत संसद द्वारा चर्चा कराकर पास कराई जाए। इन्हीं मांगों को लेकर तपस्या कर रहे हैं। वे एक मात्र वैज्ञानिक हैं, जो गंगा की बीमारी को समझते हैं और उसकी सर्वोत्तम चिकित्सा कर सकते हैं। इस कार्य के सरकार की प्रतिबद्धता चाहिए। इसमें देवेंद्र भगत जी, विशाल जैन, राधेश्याम शर्मा, राजपाल शर्मा, अजय सोती, शेरद्दीन आदि रहे।