पंजीकरण में गड़बड़ी का दंश झेल रहे 44 हजार किसान
बड़ौत (बागपत)। जिले के करीब 44 हजार किसानों को खसरा-खतौनी के अनुरूप पंजीकरण में वास्तविक भूमि न दर्शाने का नुकसान उठाना पड़ रहा है। वर्ष 2014 में कराए गए पंजीकरण में इन किसानों की जमीन विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही से आधी-अधूरी दर्ज कर दी गई है। इससे किसानों को सरकार से खाद और बीज पर अनुदान नहीं मिल पा रहा है।
पीड़ित किसान डीएम कार्यालय, तहसील सहित कृषि विभाग के अफसरों के दफ्तरों के चक्कर काटकर थक चुके हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। दिल्ली-सहारनपुर हाईवे स्थित राजकीय बीज भंडार के आंकड़ों के अनुसार जिले के बागपत, बड़ौत, बिनौली, छपरौली, खेकड़ा और पिलाना ब्लॉक में एक लाख 28 हजार 127 किसान पंजीकृत हैं। एसडीओ कृषि तेजपाल चौहान ने बताया कि करीब 35 प्रतिशत यानी 44 हजार 844 हजार किसानों के पंजीकरण में गड़बड़ी है। इन किसानों की जमीन पंजीकरण के दौरान खसरा-खतौनी के अनुरूप नहीं दर्शाई गई है।
केस नंबर एक
ओमपाल पुत्र शिवदयाल (85) निवासी शेरपुर की वास्तविक भूमि साढ़े दस बीघा है, लेकिन पंजीकरण के दौरान मात्र एक बीघा जमीन दर्शाई गई है।
केस नंबर दो
सुनील पुत्र गजे निवासी बोहला की खसरा-खतौनी में 24 बीघा जमीन है, लेकिन पंजीकरण के दौरान उनकी भूमि मात्र 10 बीघा दर्शाई गई है।
केस नंबर तीन
सोना देवी पत्नी पीतम निवासी शबगा की वास्तविक जमीन 14 बीघा है, लेकिन पंजीकरण में मात्र दो बीघा ही दर्शाई गई है।
केस नंबर चार
मांगेराम पुत्र खासेराम निवासी जागोस की पंजीकरण में मात्र एक बीघा जमीन दर्शाई गई है, लेकिन खसरा-खतौनी में उनकी वास्तविक जमीन 24 बीघा है।
कर्मचारियों ने की लापरवाही
एडीओ कृषि रक्षा नरेशपाल ने बताया कि पंजीकरण कराने के लिए यदि किसी किसान के चार खाते हैं। पंजीकरण के लिए उसने एक फर्द लगा दी या फिर मानों चारों फर्द लगा दीं। इसके बाद वेरिफिकेशन के दौरान लेखपाल ने एक सूची बनाई, जिसमें किसान का नाम, उसके पिता का नाम, गांव का नाम, पंजीकरण में लगाई गई अलग-अलग खतौनी की संख्या व सभी खतौनी का अलग-अलग क्षेत्रफल (हेक्टेयर) मेें लिखते थे। साथ ही बैंक का नाम, आईएफएससी कोड, किसान का खाता संख्या व मोबाइल नंबर आदि कॉलम मेें भरते थे। वेरिफिकेशन होने के बाद कागजात कृषि विभाग के पास पंजीकरण के लिए जाता था। वर्ष 2014 में शासन के निर्देश के अनुसार ज्यादा से ज्यादा किसानों का पंजीकरण कराने के लिए कृषि विभाग के कर्मचारी व अन्य प्राइवेट लोग लगाए गए थे। लेखपाल से प्रमाणित जो सूची कृषि विभाग को मिली, उसी से पंजीकरण में डाटा भर लिया जाता था। मगर, समय बचाने के लिए पंजीकरण करने वाले कर्मचारियों ले अलग-अलग खतौनी की संख्या नंबर, क्षेत्रफल लिखने के बजाए, मात्र एक खतौनी संख्या व उसका क्षेत्रफल लिख दिया, बाकी छोड़ दी। इस कारण किसानों की वास्तविक भूमि का पंजीकरण नहीं हो पाया।
गड़बड़ी का ये खामियाजा भुगत रहे किसान
बड़ौत। एसडीओ कृषि तेजपाल चौहान व एडीओ कृषि नरेशपाल ने बताया कि एक हेक्टेयर भूमि में गेहूं का एक क्विंटल बीज लगता है। यदि किसी किसान की जमीन एक हेक्टेयर है और पंजीकरण में पांच बीघे जमीन दर्ज है तो उसको एक क्विंटल की बजाए मात्र 40 किलोग्राम बीज ही पर अनुदान मिलेगा। कीटनाशक दवाइयों पर भी इसी हिसाब से कम अनुदान मिलता। एक हेक्टेयर जमीन पर 2.5 किलोग्राम ट्राईकोड्रमा दवाई मिलती है। यदि किसी किसान की जमीन एक हेक्टेयर है और पंजीकरण में पांच बीघे जमीन दर्ज है तो उसे केवल एक किलोग्राम दवाई पर अनुदान मिलेगा।
किसान सम्मान निधि योजना में नहीं दिक्कत
बड़ौत। एसडीओ ने बताया कि पंजीकरण में हुई गड़बड़ी से फिलहाल प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में कोई दिक्कत नहीं है। छोटे-बड़े किसानों को एक समान धनराशि दी जा रही है। भविष्य में यदि जमीन के हिसाब से धनराशि मिलने लगी तो किसानों को परेशानी होगी। बताया कि पंजीकरण में हुई गड़बड़ी से जिला उद्यान विभाग से मिलने वाले अनुदान पर असर पड़ेगा। यदि खाद भी डीबीटी के माध्यम से मिला तो भविष्य में किसानों को दिक्कतों का सामान करना पडे़गा। फिलहाल खाद किसानों को बाजार या सोसायटी से सामान्य रूप से मिल रहा है।
बागपत जनपद में पंजीकृत किसानों की संख्या
ब्लाक किसान
बागपत 22295
बड़ौत 24776
बिनौली 28596
छपरौली 16114
खेकड़ा 18613
पिलाना 17733
प्रतिदिन सैकड़ों किसान राजकीय बीज भंडार पर इस संबंध में शिकायत लेकर आते है, जिनका मौके पर ही निस्तारण कराने का प्रयास किया जा रहा है। - तेजपाल चौहान, एसडीओ कृषि।