बड़ौत (बागपत)।
पहाड़ों मेें चल रही बारिश और यमुना में अत्यधिक पानी छोड़ने के कारण यमुना उफान पर है। यमुना किनारे बसें गांवों में फिलहाल बाढ़ जैसे हालत बन गए है, क्योंकि अब तक सैकड़ों किसानों की लाखों रुपये की लागत की फसल जलमग्न हो गई है। वहीं यमुना में ओर अधिक पानी छोड़ने सेे किसान व ग्रामीण चिंतित हैं। प्रशासन ने भी अलर्ट जारी किया। गांव में कर्मचारियों को पल-पल की सूचना देने के निर्देश दिए हैं।
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में पिछले कई दिन से भारी बारिश हो रही है। इससे वहां गांवों तक में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। बारिश केे चलते हथनी कुंड बैराज पर भी पानी का दबाव बन चला है, उसे बचाने के लिए यमुना में बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जा रहा है। यमुना नदी मेें बढ़ते जा रहे जलस्तर ने यमुना नदी किनारे कोताना, खेड़ी प्रधान, जागौस आदि सहित कई गांवों के लोगों की नींद उड़ा दी है। उन्हें बाढ़ के खतरे का डर सता रहा है।
। बाढ़ के खतरें को देखकर रात में तो ग्रामीण चैन की नींद भी नहीं सो पा रहे हैं। यदि अब बात करें नुकसान की तो अब तक जागौस गांव में दर्जनों किसानों की लाखों रुपये की फसल जलमग्न होकर बर्बाद हो चुकी है। गांव के रामफल शर्मा की 10 बीघा ईख, तिलकराम की सात बीघा लौकी, हरा धनिया, करेला और मिर्च, राजन कश्यप का नौ बीघा करेला, विजयपाल कश्यप की पांच बीघा हरी मिर्च, सुरेश कश्यप की पांच बीघा ज्वार, धनिया, करेला और नरेश कश्यप की तीन बीघा धनिया की फसल बर्बाद हो चुकी है। सभी प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
उधर कोताना गांव की बात करें तो यहां पर रमेश सैनी की नौ बीघा मिर्च, धनिया, राकेश की सात बीघा ईख, विनोद कश्यप की चार बीघा ज्वार, हरि सिंह की चार बीघा लौकी और ज्वार की फसल भी जलमग्न होकर बर्बाद हो चुकी है। अब उन्हें यमुना के उफान से गांव में जान-माल की चिंता हो रही है। हालांकि यमुना में अत्यधिक पानी छोड़ने के बाद प्रशासन ने भी अलर्ट जारी किया। एसडीएम अरविंद कुमार द्विवेदी ने बताया कि यमुना किनारे बसें गांवों मेें तहसील व लेखपाल कर्मचारियों की टीम लगा रखी है, जो पल-पल की सूचना प्रशासन को दे रही है। लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है। फिलहाल अभी तक यमुना के पानी से अधिक नुकसान नहीं हुआ है।