हैंडपंपों के पानी की जांच करके बार-बार स्वच्छ पेयजल का दावा करने वाले जल निगम की लापरवाही आखिरकार सामने आ ही गई। एनजीटी ने सख्ती दिखाई और केंद्रीय जल निगम की इकाई की पानी की रिपोर्ट आई, तो तुरंत ही यूपी जल निगम की जांच भी बदल गई। जल निगम द्वारा कराई गई पानी की जांच में 34 में से 29 नमूने फेल पाए गए।
अब जल निगम ने स्वीकार किया है कि हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं है। सीडीओ ने जिन हैंडपंपों के नमूने फेल पाए गए हैं, उनको बंद कराने के आदेश कर दिए हैं। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा यूपी सरकार के साथ यूपी जल निगम और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित प्रशासनिक अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करने के बाद सभी के होश उड़े हुए हैं।
यही नहीं केंद्रीय जल निगम की जांच में भी पंानी पीने योग्य नहीं बताया गया, जिससे यूपी जल निगम की काफी किरकिरी हुई। पहले पानी की जांच यूपी जल निगम की गाजियाबाद स्थित प्रयोगशाला में कराई गई थी, जिसमें अलग-अलग एक दर्जन गांवों के लगभग 70 नमूनों की जांच कराई और प्रयोगशाला में जांच के बाद सभी नमूनों का पानी साफ एवं शुद्ध बताते हुए पूरी तरह पीने योग्य करार दिया।
यही नहीं दोबारा भी जांच में अपनी पुरानी रिपोर्ट को ही दोहराया गया। हालांकि एनजीटी की सख्ती के बाद जल निगम ने अलग-अलग छह गांवों के पानी के 56 नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला के लिए भेजे गए, जिनमें से प्रयोगशाला ने 11 नमूने तो वापस कर दिए। जबकि 45 सेंपल में से 34 की जांच रिपोर्ट भेज दी।
जल निगम द्वारा इस बार चौंकाने वाली जांच रिपोर्ट दी। रिपोर्ट के अनुसार 85 प्रतिशत नमूने फेल पाए गए। 34 में से सिर्फ 5 नमूने ही ठीक मिले, जबकि 29 नमूने फेल पाए गए। इस रिपोर्ट से प्रशासन के भी होश उड़े हुए हैं। इन सभी हैंडपंपों को बंद कराने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।