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राहत के नाम पर सिर्फ वायदे किए

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बागपत। काठा गांव में गम पसरा है। एक साल पहले आज ही के दिन जीवनदायिनी यमुना में नाव समा जाने से 19 लोगों की मौत हो गई थी। राहत कार्य में देरी और भयावह हादसे से गुस्साए लोगों ने लाशों को दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर रखकर जाम लगा दिया था। नाराज लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। महिला हेल्प लाइन की गाड़ी में आग लगा दी थी । एक साल बाद भी ग्रामीण गम जदा हैं। कहते हैं कि राहत के नाम पर सिर्फ वायदे किए गए हैं।
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काठा का सावेज कहता है कि नाव हादसे में उसके पिता इलियास एवं बहन मोहसिना की मौत हुई थी। शासन से चार लाख रुपये का मुआवजा दिया। इसके बाद जो वायद किए, उन्हें अब तक पूरा नहीं किए हैं। अब परिवार आर्थिक तंगी झेल रहा है। कमाने वाला कोई नहीं है। तीन बहनों की शादी करनी है।
महिला मीरा कहती हैं कि उसकी बेटी मोनी की नाव हादसे में मौत हो गई थी। पति की पहले ही मौत हो चुकी है। बेटी की मौत के बाद परिवार टूट गया । परिवार में कमाने वाला कोई नहीं है, आर्थिक परेशानियां झेलनी पड़ रही है।
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नीटू कहता है कि उसकी बहन सविता उर्फ छोटी की नाव हादसे में मौत हुई थी। शुरूआत में चार लाख की आर्थिक मदद दी, इसके बाद जिला पंचायत और शासन से आर्थिक मदद का भरोसा दिलाया गया, लेकिन कोई मदद नहीं मिली।
जोगेंद्र ने बताया कि उसकी पत्नी श्यामबीरी की नाव हादसे में मारी गई थी। सरकार ने दो बार दो-दो लाख रुपये के चेक दिए। पत्नी का बीमा कराया हुआ था। वह बीमा कंपनी के चक्कर काट रहा है। उसे आज तक बीमा नहीं मिला।
ग्रामीण जसवंत ने बताया कि उसकी पत्नी रामबीर की नाव हादसे में मौत हुई थी। विधायक योगेश धामा ने पंचायत में घोषणा की थी कि मरने वाले हर व्यक्ति के परिवार को जिला पंचायत की तरफ से भी दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाई जाएगी, लेकिन अब तक कोई मदद नहीं की गई है।


क्यों हुआ था हादसा
बागपत। जिस नाव से किसान और मजदूर यमुना पार कर रहे थे, उसमें करीब 55 लोग सवार थे। नाव की क्षमता करीब 10 लोगों को यमुना पार कराने की है। इसमें खाद के बोरे एवं अन्य कृषि यंत्र भी रख लिए। वजन अधिक हो गया और नाव कुछ दूर जाते ही यमुना में समां गई थी।

एक साल में लगाया बोर्ड, कोई इंतजाम नहीं
बागपत। हादसे के बाद यमुना के रास्ते पर प्रशासन ने बोर्ड लगवा दिया कि यमुना गहरी है, लेकिन सैकड़ों बीघा जमीन यमुना नदी के पार बोने वाले किसानों के लिए कोई इंतजाम नहीं किया। किसानों को बीस से तीस किमी घूमकर खेतों में जाना पड़ता है या फिर यमुना से ही मौत की बाजी लगाकर यमुना पार करते हैं।

सात-सात लाख देने की हुई थी घोषणा
बागपत। तत्कालीन डीएम भवानी सिंह खंगारौत ने मृतकों के आश्रितों को दो-दो लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष और पांच-पांच लाख रुपये सर्व हित बीमा योजना से देने की घोषणा की थी। जिला पंचायत से आर्थिक मदद देने का एलान भी हुआ था, लेकिन अभी तक मदद नहीं मिली।

इन लोगों की हुई थी मौत
इलियास (55) पुत्र शेरदीन
रामपाल (52) पुत्र हरनारायण
मनीष (42) पुत्र रामपाल
तेजपाल (45) पुत्र दरियाव सिंह
अनिल (20) पुत्र बालेश्वर
सुनील (किसान विनोद का नौकर) सोनभद्र
नजीरन (55) पत्नी मंगते
रज्जो (42) पत्नी बरसे
जुबैदा (55) पत्नी अल्लाह बंदा
संतरा (53) पत्नी ओमवीर
मोनी (17) पुत्री श्रीभगवान
श्यामवीरी (32) पत्नी जोगेंद्र सिंह
रेखा (35) पत्नी सुमेंद्र सिंह
सविता (19) पुत्री रतन सिंह
रामबीरी (28) पत्नी जसवंत
सोहनवीरी (55) पत्नी बालीराम
काजल (16) पुत्री सोहनवीर
शमा (20) पुत्री मौसम
मोहसिना (20) पुत्री इलियास

मसीहा बनकर मौत से लड़ा था अनिल
बागपत। एक तरफ मौत तांडव कर रही थी और दूसरी तरफ मसीहा बनकर अनिल खड़ा था। एक या दो नही बल्कि पूरी पांच जिंदगियां बचाई। अंतिम सांस तक वह मौत से लड़ता रहा, लेकिन लोगों को बचाते-बचाते खुद जिंदगी की जंग हार गया था। उसके घर में आज भी मातम पसरा है।
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