बागपत। इस बार नवरात्र का आगमन शुभ है और गमन दुखदायी सिद्ध हो सकता है। मां भगवती की सच्चे मन से आराधना से सभी कष्ट समाप्त हो जाएंगे। कलश स्थापना 06:19 बजे शुभ है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार 09:20 के बाद 11:14 बजे तक भी कलश स्थापना करना शुभ रहेगा।
नवरात्र चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा दिन रविवार से शुरू हो रहे हैं। इस बार नवरात्र आठ दिन के हैं। अष्टमी और नवमी 25 मार्च को है। ज्योतिषाचार्य पंडित राज कुमार शास्त्री ने बताया कि मां भगवती इस बार हाथी पर सवार होकर आ रही है जो सुख, शांति एवं लाभ का योग बनाएगी। वहीं मां का गमन भैंसें पर होने के कारण शुभ संकेत नहीं है। इस कारण रोग, दुख और व्याधि के साथ अशांति का योग बन सकता है। नवरात्र का घटना (कम) भी शुभ नहीं माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि मां भगवती का दिव्य पूजन करने से अशुभ शुभ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि घट स्थापना शुभ मुहूर्त में करने से सब उत्तम होगा। कलश स्थापना 06:19 बजे शुभ है, लेकिन 09:20 के बाद 11:14 बजे तक भी कलश स्थापना करना शुभ रहेगा। घट स्थापना रेत या मिट्टी के ऊपर की जाती है। उसमें जो बोना शुभ माना जाता है। कलश स्टील का नहीं होना चाहिए। मिट्टी का कलश शास्त्र में सबसे उत्तम है। कलश के ऊपर दोघट (दो बर्तन) रखे, पंच पल्लव (आम, बड़, पीपल, गूलर, पिलखन) के पत्ते लगाए, उसके ऊपर पात्र में साबुत चावल रखे। लाल वस्त्र में पानी वाला नारियल बांधकर रखे। कलश में गंध, सुपारी, लांग, इलायची, चांदी का सिक्का डाले। घट स्थापना पूजा स्थल के ईशान कोण में करनी चाहिए। अखंड दीप रखा जाना चाहिए। इसके बाद मां भगवती के लिए चौकी रखे। चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर मां भगवती की स्थापना करें। उनके पास भैरव जी की भी स्थापना करें। माता को प्रसन्न करने के लिए तेल का अखंड दीप जलाए।
परिवार के साथ करें मां भगवती की पूजा
पूजा में पत्नी को दाहिने बैठाना चाहिए। परिवार के सभी सदस्यों के साथ पूजा करें। लोटे में जल, चम्मच, थाली में रौली कलावा, लांग, इलायची, सुपारी, गोला मिश्री का प्रसाद, फूल, फल, पान, कपूर रखे। भगवती से परिवार में सुख शांति की कामनाएं करें।