फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डीएम-डीसीओ हाईकोर्ट में पेश हुए , अगली सुनवाई 13 मार्च को

विज्ञापन
विज्ञापन
बागपत। मलकपुर चीनी मिल पर वर्तमान पेराई सत्र के करीब 235 करोड़ रुपये बकाया होने के मामले में डीएम और डीसीओ हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में पेश हुए। हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 13 मार्च की तिथि तय की । डीसीओ सुशील कुमार ने बताया कि मलकपुर मिल पर भुगतान नहीं करने पर प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई कोर्ट के समक्ष रखी।
विज्ञापन

मलकपुर चीनी मिल का भुगतान लटका होने से हाईकोर्ट ने डीएम ऋषिरेंद्र कुमार और डीसीओ सुशील कुमार को तलब किया । बुधवार को दोनों अफसर कोर्ट में हाजिर हुए। डीसीओ ने बताया कि कोर्ट को बताया चीनी मिल की आरसी जारी कर दी, इसके अलावा अध्याशी पर मुकदमा दर्ज कराया और उनकी तलाश कराई जा रही है। हाईकोर्ट में पक्ष रखे जाने के बाद अब इस प्रकरण की सुनवाई 13 मार्च को होगी। अगली तिथि पर डीएम और डीसीओ को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने में भी छूट मिली है। दोनों अधिकारी अपने प्रतिनिधि भेज सकते हैं।

क्या था मामला?
मलकपुर चीनी मिल वर्तमान पेराई सत्र से बनने वाली चीनी बेचकर पिछले सत्र का भुगतान कर रही है। हाईकोर्ट ने वर्तमान पेराई सत्र का सिर्फ 17 करोड़ रुपये भुगतान होने पर अधिकारियों को तलब किया । जबकि नियम है कि प्रत्येक 14 दिन बाद किसानों को भुगतान मिलना चाहिए।
विज्ञापन


चीनी मिल को ऐसे मिला था समय
मलकपुर चीनी मिल ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में हलफनामा दाखिल किया था कि वह 31 मार्च तक पेराई सत्र 2016-17 का पूर्ण भुगतान कर देंगे, लेकिन दिसंबर माह में चीनी मिल ने 40 करोड़ के बजाए 23 करोड़ का भुगतान किया। मिल का तर्क था कि उनके खाते से प्रशासन ने पिछले सत्र के बजाए 17 करोड़ रुपये से वर्तमान पेराई सत्र का भुगतान करा दिया। इस वजह से वह पूर्ण भुगतान नहीं कर सके। ऐसे में यह 17 करोड़ देने के लिए मिल को अब 31 मार्च के बजाए 15 अप्रैल तक का समय कर दिया।

इस बार इस तरह कम रहे हैं भुगतान
बागपत। भुगतान के लिए वर्तमान पेराई सत्र में चीनी मिल के अध्याशी और डीसीओ का संयुक्त खाता खोला गया है। दोनों के संयुक्त हस्ताक्षर से मिल से बिकने वाली चीनी, शीरे के रुपये से किसानों को भुगतान किया जाता है। वर्तमान पेराई सत्र से होनी वाली आय से पिछले सत्र का भुगतान कराया जा रहा है। जबकि वर्तमान पेराई सत्र का सिर्फ 17 करोड़ रुपये का भुगतान ही किया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें