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अमर उजाला इंपैक्ट.....

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बड़ौत (बागपत)।
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दादू बलराम संस्कृत महाविद्यालय, ग्वाली खेड़ा मेें आरक्षण नियम को ताक पर रखकर की पांच अध्यापकों और एक लिपिक की नियुक्ति में की धांधली की खबर अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित होते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया। डीआईओएस ने शिकायत पर जांच बैठा दी। जांच की सूचना मिलते ही महाविद्यालय के संचालकों में अफरा-तफरी मची है।
दादू बलराम संस्कृत महाविद्यालय, ग्वाली खेड़ा में आरक्षण नियम को ताक पर रखकर छह नियुक्तियों में धांधली का मामला प्रकाश में आया है। बड़ौत की सूर्यनगर कॉलोनी निवासी शिकायतकर्ता राज कुमार ने इस मामले मेें डीएम और डीआईओएस को पत्र भेजकर नियुक्तियों की जांच कराने की मांग की है। पत्र में शिकायतकर्ता ने बताया दादू बलराम संस्कृत महाविद्यालय, ग्वाली खेड़ा में जून 2015 से 31 मार्च 2017 तक छह नियुक्तियां की। इनमें पांच अध्यापकों और एक लिपिक की नियुक्ति की। इन नियुक्तियों में आरक्षण का कोई ध्यान नहीं रखा। जबकि अनुदानित संस्थान में सरकार द्वारा निर्धारित आरक्षण 27 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग और 23 प्रतिशत अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के लिए है, लेकिन इस आरक्षण के मापदंड का चयन समिति ने ध्यान नहीं रखा और अनुसूचित जाति के पद भी सामान्य जाति के व्यक्ति से भर लिए। इससे आरक्षित वर्ग का हनन होता है जो शासनादेश का उल्लंघन है।
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इस मामले को बुधवार के संस्करण में अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया तो शिक्षा विभाग के अफसरों में हड़कंप मच गया। मामले का संज्ञान लेते ही डीआईओएस पीके मिश्रा ने जांच बैठा दी है। इससे महाविद्यालय के संचालकों में हड़कंप मच गया है। इस संबंध में डीआईओएस पीके मिश्रा ने कहा शिकायत मिली थी। इसकी जांच शुरू कर दी। इस संबंध में महाविद्यालय के कार्यवाहक प्राचार्य ब्रजमोहन शर्मा ने कहा नियुक्तियों में कोई धांधली नहीं की। जिन पदों पर नियुक्तियां हुई है, सभी में नियम का ध्यान रखा गया है। आरोप निराधार हैं।
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