बागपत। पूर्व मंत्री नवाब कोकब हमीद जीवन के संघर्षों में तपकर कुंदन बने थे। जब वह सिर्फ 16 साल के थे, तब उनके पिता का इंतकाल हो गया। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से एलएलबी की। प्राइवेट कंपनी में कई साल तक नौकरी की। राजनीति में कदम रखा तो सिर्फ 33 साल की उम्र में ही वह कांग्रेस के टिकट पर बागपत से विधायक चुन लिए गए थे। साल 1987 में उन्हें ऊर्जा राज्यमंत्री की जिम्मेदारी दी।
बागपत के दिवंगत नवाब शौकत हमीद खान के घर में नवाब कोकब हमीद का जन्म 23 मई 1952 को हुआ। शौकत हमीद खान साल 1962 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। देश में कांग्रेस लहर थी और बागपत की हवेली पर दिग्गज राजनीतिज्ञों की आवाजाही रहती थी, लेकिन कुदरत को कुछ ओर ही मंजूर था। जिस वक्त नवाब कोकब हमीद की उम्र केवल 16 साल थी, उनके वालिद का इंतकाल हो गया। बेटे के लिए वालिदा सहारा बनीं। पढ़ाई के लिए अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी गए और यहीं से एलएलबी की। विरासत से बागपत के नवाब और करोड़ों की संपत्ति होने के बाद भी उन्होंने एक प्राइवेट कंपनी में कई साल तक नौकरी भी की, लेकिन समर्थकों की चाहत के चलते साल 1984 में फिर से समाजसेवा और राजनीति में सक्रिय हो गए।
सात चुनाव लड़े, पांच जीते, तीन बार रहे मंत्री
बागपत। नवाब कोकब हमीद सरलता, ईमानदारी और राजनीति की समझ वाले व्यक्ति के तौर पर पहचाने गए। उन्होंने पहला चुनाव वर्ष 1985 में कांग्रेस के टिकट पर लड़ा। साल 1989 के चुनाव में वह हार गए। साल 1991 का चुनाव उन्होंने नहीं लड़ा। इसके बाद साल 1993 में कांग्रेस के टिकट पर ही फिर विधायक बनें। साल 1996 में भारतीय किसान कामगार पार्टी में शामिल हो गए। रालोद से 2002 और 2007 में वह विधानसभा चुनाव जीते। साल 2012 में वह चुनाव हार गए थे। प्रदेश की अलग-अलग सरकारों में वह ऊर्जा राज्यमंत्री, ग्रामीण एवं अभियंत्रण मंत्री और पर्यटन मंत्री रहे। विधानसभा में रालोद के नेता भी रहे।
पश्चिम यूपी की राजनीति में बनाई पहचान
बागपत। नवाब कोकब हमीद ने पश्चिम उत्तर प्रदेश की मुस्लिम राजनीति में खास पहचान बनाई। कांग्रेस के बाद वह चौधरी अजित सिंह के साथ भारतीय किसान कामगार पार्टी में शामिल हुए। भारतीय किसान कामगार पार्टी बाद में रालोद बना। इसके बाद वह हमेशा रालोद से जुड़े रहे। पश्चिम यूपी की राजनीति में उनकी पहचान ईमानदार नेता के तौर पर बनीं।
कोकब हमीद के बेटे अहमद हमीद ने 2017 में बसपा से लड़ा चुनाव
बागपत। खुद साल 2012 के विधानसभा चुनाव में वह रालोद के टिकट पर बागपत सीट से हार गए थे। इसके बाद बीमार पड़ गए। उनके बेटे अहमद हमीद ने साल 2017 का चुनाव बागपत सीट से बसपा के टिकट पर लड़ा, लेकिन हार गए। हालांकि बाद में अहमद हमीद भी रालोद में शामिल हो गए। नवाब कोकब हमीद बार-बार यह कहते रहे हैं कि उन्होंने कभी रालोद नहीं छोड़ी।