बागपत। घुमंतू गोवंश किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बन गए हैं। फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। कहीं खेतों की तार बंदी की जा रही है तो कहीं पहरा बैठाया जा रहा है। घुमंतू गोवंश खेत में घूमकर गेहूं, जई, आलू, गाजर, मूली, बरसीम और सरसों की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं। एकाएक इनकी संख्या बढ़ने से किसान परेशान हैं। सरूरपुर कलां, ट्योढ़ी, मलकपुर, दाहा, दोघट, रमाला सहित अन्य गांव में किसान पहरेदारी कर रहे हैं। किसानों ने कहा प्रशासन से कई बार खेतों में हो रहे नुकसान से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकाला जा रहा है। परेशान किसान इन पशुओं को वाहनों में लादकर एक-दूसरे के गांव में भी छोड़ने के लिए मजबूर हैं। सरूरपुर कलां के किसान सुभाष नैन ने कहा जिन किसानों ने गन्ना काटकर गेहूं और जई की बुवाई कर दी है, उनके खेतों में यह पशु नुकसान पहुंचा रहे हैं। सब्जी पैदा करने वाले किसान परेशान हैं। दुड़भा और मवी कलां खुर्द के जंगल में पशुओं को घूमते देखा जा सकता है। बिहारीपुर के किसान इंद्रपाल ने कहा प्रशासन को गोवंश को गौशालाओं में छुड़वाने का इंतजाम करना चाहिए, क्योंकि फसलों को नुकसान पहुंच रहा है। प्रत्येक जिले में गोवंश के लिए गौशाला बनें, जहां इनके लिए चारे की व्यवस्था की जाए।
ब्लेड वाले तार से कट रहे हैं पशु
बागपत। छपरौली क्षेत्र के कई गांवों में किसानों ने फसलों को नुकसान से बचाने के लिए ब्लेड वाले तार लगाए हैं। इन तारों से कटकर कई पशुओं की मौत हो चुकी है।
प्रत्येक जिले में बनें गौशाला
बागपत। विहिप के नगर मंत्री विक्की चौधरी कहते हैं कि प्रत्येक जिले में सरकारी भूमि पर गौशाला बननी चाहिए। यहां पर गौवंश को रखा जाए और उनके लिए चारे का इंतजाम किया जाए। किसानों की फसलें बचेंगी और गोवंश भी सुरक्षित रहेगा। उधर, आदर्श नंगला के किसान सत्यपाल सिंह, जितेंद्र कुमार और सतेंद्र कुमार का कहना है कि गौशाला की व्यवस्था होनी चाहिए।
प्रत्येक तहसील में बनेगा एक पशुबाड़ा
बागपत। प्रदेश के विशेष सचिव सुशील कुमार मौर्य ने डीएम, पंचायती राज विभाग के निदेशक, जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी को गोवंशों के रख-रखाव हेतु जिला पंचायत के नियंत्रणाधीन काजी हाउस (पशु बाड़े) को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक तहसील क्षेत्र में एक काजी हाउस स्थापित कराने की रूपरेखा तैयार की जाए।
लेकिन एएमए कर रहे हैं इंकार
बागपत। जिला पंचायत के एएमए प्रदीप सक्सेना का कहना है कि उन्हें इस तरह के आदेश की जानकारी नहीं है। जिला पंचायत की ओर से अभी इस तरह के पशुबाड़े बनाने की योजना नहीं है।