आठ किमी जाने में लग गए ढाई घंटे
बागपत। काठा में नाव यमुना में समा गई, चीख-पुकार मची। देखते ही देखते 19 लोगों की मौत हो गई। प्रशासन के आला अधिकारियों को जिला मुख्यालय से यमुना किनारे तक करीब आठ किमी पार करने में ढाई घंटे लग गए। हादसे की भयावहता समझने और देरी से मौके पर पहुंचने की वजह से ही लोगों का आक्रोश भड़का।
काठा में हादसा बृहस्पतिवार सुबह करीब पौने सात बजे हुआ। नाव धंसने के आधे घंटे तक मौके पर अफरा-तफरी का माहौल रहा। जो ग्रामीण मौके पर थे, वह मदद में जुट गए। गांव में धार्मिक स्थलों से एलान कराया गया। घटनास्थल से गांव की दूरी करीब तीन सौ मीटर है। खेत से किसान और गांव से ग्रामीण दौड़ पड़े। पुलिस को सूचना दी गई। जिला अस्पताल का रिकॉर्ड देखें तो यहां बेहोशी की हालत में पहला घायल सुबह सात बजकर 40 मिनट पर पहुंचा। डीएम भवानी सिंह खंगारौत सुबह करीब सवा नौ बजे मौके पर पहुंचे। यानि हादसे के करीब ढाई घंटे बाद वह मौके पर गए। यही हाल अन्य अधिकारियों का रहा। जिला मुख्यालय से करीब आठ किमी काठा है। इससे जाहिर है कि हादसे के बाद अधिकारियों को यह सफर करने में करीब ढाई घंटे लग गए। यही वजह है कि लोगों का गुस्सा भड़का। यमुना किनारे लाशों के पास डीएम ने पीड़ित परिवारों को मनाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माने। दस बजे तक भी प्रशासन के पास यमुना में कितने लोग सवार थे और एनडीआरएफ की टीम कब आएगी, इसका जवाब नहीं था।
क्या है काठा हादसे की वजह
बागपत। काठा हादसे की कई वजह है। अवैध तरीके से छोड़ा गया नाव का ठेका। अधिक सवारियां बैठाने का नाविक का लालच, लोगों के साथ नाव में खाद के बोरे भरवा लेना। अवैध रेत खनन से बने गड्ढे और प्रशासनिक अदूरदर्शिता क्योंकि पुलिस-प्रशासन ने इस प्वाइंट की अनदेखी की और कभी चेकिंग अभियान नहीं चलाया जबकि ग्रामीण कहते हैं कि कई बार यहां अवैध शराब की तस्करी की शिकायत पुलिस से की गई थी।