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जिला जाट सभा के वार्षिक चुनाव में हंगामा, धक्का-मुक्की

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बागपत। जिला जाट सभा के वार्षिक चुनाव में पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की मूर्ति, जाट आरक्षण सम्मेलन पर खर्च और समाज के नाम पर गैर बिरादरी के मेधावियों को सम्मानित करने पर जमकर हंगामा, धक्का-मुक्की हुई और लाठी (बेंत) तक को लहराया गया। इससे टकराव के हालात बन गए। इस दौरान भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने हस्तक्षेप कर बीच-बचाव कराया।
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रविवार को दिल्ली रोड पर स्थित जाट भवन में आयोजित त्रिवार्षिक चुनाव और सम्मेलन में कार्यकारिणी के खर्च को लेकर जमकर हंगामा हुआ। जाट सभा के सदस्यों के एक पक्ष का कहना था कि जाट आरक्षण और जाट सम्मेलन के नाम पर करीब नौ लाख रुपये खर्च किए। जाट समाज के मेधावियों के नाम पर अन्य बिरादरी के छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा को लेकर भी वाक युद्ध हुआ। मामला इतना बढ़ गया कि एक पक्ष के लोग बेंत लेकर मेज पर ही चढ़ गए। गन्ना विकास समिति के डायरेक्टर विनोद खेड़ा का कहना है कि जो प्रतिमा लगाई गई है, वह ठीक से बनीं हुई नहीं है। कमेटी ने साल 2016 में जाट आरक्षण सम्मेलन के नाम पर पांच लाख से अधिक खर्च कर दिए, जबकि इसकी जरूरत ही नहीं थी। कमेटी के पदाधिकारियों और सदस्यों के एक पक्ष के बीच धक्का-मुक्की हुई। भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत, चौधरी धर्मपाल सिंह, कृष्णपाल सिंह, खेकड़ा ब्लॉक प्रमुख जितेंद्र धामा, वीरेंद्र राणा और जयपाल सिंह और समाज के अन्य लोगों ने हस्तक्षेप कर बीच-बचाव कराया। दोनों पक्षों को शांत किया, इसके बाद चुनाव की प्रक्रिया फिर शुरू हुई। इस दौरान जिला जाट सभा के अध्यक्ष जगपाल तेवतिया और महासचिव नगेंद्र सिंह ने करीब 26 लाख रुपये के आय व्यय का ब्योरा पेश किया। इससे पहले अतिथियों को सम्मानित किया।

भाषण के बीच में हंगामा, कार्यक्रम छोड़ चले गए छपरौली विधायक
बागपत। जाट सभा के कार्यक्रम में छपरौली के भाजपा विधायक सहेंद्र सिंह रमाला बुलाए गए थे। उन्होंने भाषण में जाट समाज में एकता का अभाव और पिछले सालों में हुए राजनीतिक नुकसान का जिक्र किया। रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय साहब सिंह सहित कई नेताओं के नाम भाषण में लिए। इस बीच सभा में से किसी सदस्य ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। विधायक ने बताया कि वह सिर्फ समाज की एकता की बात कर रहे थे। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक तूल देने की कोशिश की। भाषण के बीच में ही हंगामे की स्थिति बन गई। सभा के पदाधिकारियों ने मामले को संभालने की कोशिश की, लेकिन हंगामा होता रहा। इसके बाद सहेंद्र सिंह रमाला अपने समर्थकों के साथ कार्यक्रम से चले गए। कुछ देर बाद ही भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत भी बगैर भाषण दिए कार्यक्रम से चले गए।
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इसलिए कर रहे थे विरोध
बागपत। गन्ना विकास समिति के डायरेक्टर विनोद खेड़ा का कहना था कि समाज के धन का दुरुपयोग किया गया है। इसी को लेकर कमेटी के पदाधिकारियों के सामने उन्होंने विरोध किया था। जो धन खर्च किया गया है, उसका ब्योरा लेना सदस्यों और समाज का दायित्व है। कुछ लोगों की भाषा गलत थी, जिसका वह विरोध कर रहे थे।

निर्विरोध चुन ली जाट सभा की कमेटी
बागपत। जिला जाट सभा के वार्षिक चुनाव में हंगामे के दौरान निर्विरोध कमेटी का गठन कर लिया गया। चुनाव अधिकारी एडवोकेट रामपाल नेहरा बनाए । डॉ महावीर सिंह, पूर्व चेयरमैन हरेंद्र सिंह, कृष्णपाल चेयरमैन, ब्लाक प्रमुख खेकड़ा जितेंद्र धामा, ईश्वर सिंह को पंच बनाया । सर्वसम्मति से महावीर सिंह को अध्यक्ष, अश्वनी तोमर को महासचिव बनाया। मुख्य संरक्षक विनोद खेड़ा को मनोनीत किया। इसमें धर्मपाल सिंह, वीरेंद्र राणा, अशोक तोमर, बृजवीर मलिक, एडवोकेट चरण सिंह खोखर, राकेश कुमार, डॉ. अनिल डबास, शीशपाल सिंह, तेजवीर, देवेेंद्र आर्य एडवोकेट, ओमवीर ढाका, जयवीर तोमर, सतेंद्र खोखर मौजूद रहे।
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किसने क्या कहा
भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि किस बात को लेकर हंगामा हुआ, वह नहीं जानते हैं। बीच-बचाव कराने के बाद वह उठकर चले आए थे।
छपरौली विधायक सहेंद्र सिंह रमाला का कहना है कि वह समाज की एकता की बात कर रहे थे। किसी पर किसी तरह की कोई टिप्पणी नहीं की गई।
जाट सभा के पूर्व महासचिव नगेंद्र सिंह का कहना है कि कार्य पूरी ईमानदारी के साथ किया। समाज के सामने ब्योरा पेश किया है।
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