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15 गांव में शौचालयों के लिए नहीं बजट

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बागपत। अगले माह गांधी जयंती पर जिले को खुले में शौच मुक्त घोषित किए जाने का लक्ष्य पूरा होता नहीं दिख रहा है, लेकिन करीब 15 गांवों में शौचालय निर्माण के लिए बजट ही नहीं है। जो गांव ओडीएफ हो चुके हैं, इनकी भी शिकायतें अफसरों तक पहुंच रही है। बजट के लिए डीपीआरओ ने डिमांड भेजी है, लेकिन स्वीकृति नहीं मिली है।
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स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले को खुले में शौच से आजादी दिलाने के लिए 31 दिसंबर निर्धारित किया। प्लान में बदलाव किया तो शासन ने गांधी जयंती पर जिले को ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) बनाने के निर्देश जारी किए। जिला स्तर पर अफसरों ने कार्य में तेजी शुरू कर दी। लोगों को खुले में शौच न जाने के प्रेरित किया और स्वच्छता वैन से जागरूक किया। जिला स्तर पर अफसरों का प्लान कारगर होता नजर नहीं आ रहा है। 15 गांव में करीब चार हजार शौचालय की दरकार है। जिसके लिए जिला पंचायत राज विभाग ने शासन से बजट की मांग की हुई है। अभी तक बजट नहीं मिला है, इस कारण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। दर्जनों गांव ऐसे हैं, जहां पर मानक के अनुसार शौचालय नहीं बने हैं। कहीं प्रधानों पर शौचालय को चेक न देने का आरोप लग रहे हैं।
दत्तनगर की महिला शौचालय के लिए अफसरों के दफ्तरों में चक्कर लगा रही है, लेकिन कार्य नहीं हो रहा है। यमुना, हिंडन और कृष्णा के किनारे बसे गांवों में भी शौचालय आधे अधूरे हैं। अपात्रों का योजना का लाभ देने के आरोप लग रहे हैं। डीपीआरओ संजय कुमार यादव ने कहा जो भी शिकायत मिलती है, वहीं जांच कराई जाती है। दो अक्तूबर तक हर हाल में जिले को ओडीएफ घोषित कर दिया जाएगा। 15 गांवों के लिए जल्द बजट मिलने वाला है। इनमें मुकंदपुर, कुरडी, असारा, हेवा, मीतली, तुगाना, बिनौली, दरकावदा, निरपुड़ा, सिंघावली अहीर, अमीपुर बालैनी सहित 15 गांव हैं।
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