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युवकों को जुडो-कराटें व तलवार चलाना सिखाया

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बड़ौत (बागपत)। चौधरी केहर सिंह पब्लिक स्कूल में आर्य प्रतिनिधि सभा बागपत द्वारा आयोजित योग एवं चरित्र निर्माण शिविर के चौथे दिन बालकों को जूडो कराटे, योग आसन, लाठी व तलवार चलाने का अभ्यास कराया गया।
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बौद्धिक कक्षाचार्य यशवीर जी द्वारा बालकों को जड़ व चेतन आदि देवताओं और उनकी पूजा, भूत प्रेत आदि अंध विश्वासों के विषय में बताया। उन्होंने शास्त्रों में वर्णित देवों की परिभाषा के अनुसार जड़ व चेतन आदि पदार्थों को दान करने, प्रकाश करने, उपदेश करने आदि के कारण देव की संज्ञा दी जाती है। जड़ आदि भौतिक व प्राकृतिक पदार्थों का सदुपयोग व उनका उचित रख रखाव करना ही उनकी पूजा है। चेतन देवताओं में परमात्मा, विद्वान, गुरु, अतिथि व माता-पिता आदि की आज्ञाओं का पालन करना, उनकी सेवा सुश्रुषा करना ही उनकी पूजा है। इसके अतिरिक्त जड़ पदार्थों व पत्थर की मूर्ति, वृक्ष, जल आदि के सामने दीपक जलाना, भोग लगाना आदि कार्य अंधविश्वास की श्रेणी में आता है, जिसका कोई लाभ नहीं है। इसी प्रकार स्वार्थी लोगों के द्वारा अपने स्वार्थ की पूर्ति के लिए भूत, प्रेत, चुड़ैल आदि का भ्रम उत्पन्न किया गया है। वेद व वैदिक साहित्य में पुनर्जन्म का सिद्धांत दिया गया है, जिसका अर्थ है कि परमात्मा की व्यवस्था में जन्म और मृत्यु क्रम से निरंतर आते रहते हैं। जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु निश्चित है और जिसकी मृत्यु हुई है, उसका जन्म निश्चित है। यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है. जो पहले था किंतु अब नहीं है, उसे काल की दृष्टि से भूत कहते हैं और जब शरीर से आत्मा निकल कर चली जाती है तो उस आत्माविहीन शरीर को प्रेत कहते हैं, जिसको बाद में जला कर नष्ट कर दिया जाता है। अत: हम सभी को वेद आदि सत्य व ऋषिकृत ग्रंथों पर विश्वास करना चाहिए और स्वार्थी मनुष्यों की बातों का तिरस्कार करना चाहिए जो मनुष्यों में भ्रम उत्पन्न कर अंध विश्वास पैदा करने वाले हैं। शिविर में राजेंद्र आर्य, रिपुदमन सिंह, अशोक प्रबोध आर्य, यशपाल आर्य, कपिल आर्य, आचार्य धर्मवीर व कपिल आर्य आदि मौजूद रहे।
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