ग्लैंडर्स से संक्रमित दो घोड़ों को लगाया मौत का इंजेक्शन
बागपत। पशु चिकित्सा विभाग ने एक सप्ताह पहले नौरोजपुर गुर्जर मार्ग स्थित एक ईंट भट्ठे पर ग्लैंडर्स से पीड़ित मिले दो घोड़ों को मौत का इंजेक्शन लगा दिया। पशुपालन निदेशालय के निर्देश पर यह कार्रवाई की गई है। मृत घोड़ों को गहरे गड्ढे में पूरी प्रक्रिया के साथ दफना दिया गया है। इसके साथ ही अश्व मालिकों को 25-25 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। बागपत को कंट्रोल एरिया घोषित किया गया है।
बता दें कि शहर के नौरोजपुर गुर्जर मार्ग स्थित एक ईंट भट्ठे से पशु चिकित्सा विभाग ने कई घोड़ों के रक्त के नमूने लेकर जांच के लिए सैंपल राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र हिसार भेजे गए थे। बृहस्पतिवार को इसकी जांच रिपोर्ट आई थी। इसे देखकर पशु चिकित्सा विभाग में हड़कंप मच गया। दो घोड़ों में ग्लैंडर्स रोग की पुष्टि हुई। विभाग ने इस जानलेवा बीमारी के वर्ष 2009 के एक्ट का हवाला देते हुए घोड़ों को मारने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पशु चिकित्सा विभाग ने डीएम को मामले से अवगत कराया। अनुमति लेकर शुक्रवार को डीएम पवन कुमार की अनुमति मिलते ही टीम भट्ठे पर पहुंची। घोड़ा मालिक शाकिब और साजिद को समझाकर घोड़ों जहर का इंजेक्शन लगाने की प्रक्रिया को शुरू किया गया।
सबसे पहले टीम ने दोनो घोड़ों को बेहोश किया। इसके बाद जहर का इंजेक्शन देकर मौत की नींद सुला दिया। घोड़ों की मौत के बाद जेसीबी से गहरा गड्ढ़ा खुदवाकर दोनो घोड़े के शवों को दबवा दिया। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. रविन्द्र ने ग्लैंडर्स से संक्रमित दोनो घोड़ों को जहर का इंजेक्शन देने के बाद उसे गड्ढे में दबवा दिया है। वहीं आस-पास के लोगों को सचेत कर दिया है कि जहां घोड़े बंधे हो वहां से थोड़ा दूरी बनाए रखेंगे। इससे बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। बताया कि आदेशों के अनुसार दोनो घोड़ा मालिकों को 25-25 हजार का मुआजवा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
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पांच किमी के दायरे के सभी घोड़ों के खून की होगी जांच
सीवीओ डॉ. रविंद्र ने बताया कि अन्य जानवरों को यह बीमारी न हो यह सुनिश्श्चित करने के लिए आसपास के सभी भट्ठों के जानवरों का खून टेस्ट किया जाएगा। उन्होंने बताया कि उन्होंने 55 घोड़ों का ब्लड टेस्ट करा लिया है बाकी जानवरों के खून की जांच शीघ्र ही करा ली जाएगी। सुरक्षा के लिहाज से उन्होंने आसपास के पांच किमी के रेडियस में मौजूद सभी जानवरों के खून की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
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जानलेवा बीमारी का नहीं कोई इलाज
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी ने बताया कि ग्लैंडर्स बीमारी का कोई इलाज नहीं है। यह जानवरों के साथ-साथ मनुष्यों को भी अपनी चपेट में ले सकती है। इसलिए इससे ग्रसित जानवर को तत्काल मारना पड़ता है ताकि इसके संसर्ग से बचा जा सके। उन्होंने बताया कि इसके लक्षण घोड़े की नाक बहने लगती है, सांस लेने में दिक्कत होती है, उनके आसपास का तापमान बढ़ जाता है। उस दायरे में रह रहे लोगों को भी सांस लेने में परेशानी होने लगती हैं।
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जिले को कंट्रोल एरिया घोषित
पशु चिकित्सा विभाग की ओर से जिले को कंट्रोल एरिया घोषित कर दिया गया है। एसपी सहित तीनों एसडीएम को पत्र लिखकर जनपद में बाहरी घोड़ों व खच्चरों पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहा गया है। जिले में बाहर से अश्व प्रजाति का कोई भी पशु प्रवेश नहीं करेगा।