बागपत। लोकसभा चुनाव के नतीजे भविष्य की सियासत की राह तय करेंगे। यही वजह है कि सबकी निगाह बागपत लोकसभा के रिजल्ट पर टिकी है। गठबंधन का फार्मूला कितना कामयाब होगा। कांग्रेस ने चुनाव नहीं लड़ा, इसका रालोद को कितना लाभ मिल सकेगा। विकास और राष्ट्रवाद के मुद्दे पर चुनाव लड़ी भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी। जिसकी हाथ में बाजी होगी, वही बागपत का चौधरी होगा।
भाजपा ने केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. सत्यपाल सिंह को चुनाव मैदान में उतारा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने बागपत लोकसभा क्षेत्र के चुनाव के लिए ताकत झोंकी। बागपत में विकास और राष्ट्रवाद को भाजपा ने मुद्दा बनाया। देखने वाली बात यह होगी जनता इस बार क्या जवाब देती है।
रालोद ने इस बार लोकसभा चुनाव लड़ने का पैंतरा बदला। रालोद अध्यक्ष अजित सिंह खुद चुनाव लड़ने मुजफ्फरनगर चले गए, जबकि बागपत की परंपरागत सीट से अपने बेटे रालोद उपाध्यक्ष जयंत चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा। बसपा और बसपा से गठबंधन रालोद की मुख्य ताकत आंकी जा रही है। इसके अलावा कांग्रेस ने बागपत सीट से कोई प्रत्याशी चुनाव मैदान में नहीं उतारा। देखने वाली बात यह होगी कि इसका कितना लाभ रालोद को मिलेगा।
जाट और दलित वोटों पर टिका दारोमदार
बागपत। सियासी गलियारों में जातीय गुणा भाग की हवा भी चल रही है। बागपत लोकसभा के नतीजों को लेकर गुणा भाग लगाए जा रहे हैं। सियासत के जानकारों का कहना है कि जाट और दलित वोटों पर इस बार हार और जीत का दारोमदार टिका है।
क्या गुल खिलाएंगे डाक मत पत्र
बागपत। पिछले लोकसभा चुनाव में डाक मत पत्रों की संख्या करीब 11 सौ थी। लेकिन इस बार डाक मत पत्रों की संख्या आठ हजार के पार है। अगर हार जीत का मुकाबला नजदीकी हुआ तो मतपत्रों की भूमिका भी खास होगी।